बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं का असर बंगाल में, कोलकाता में हजारों का प्रदर्शन, लोगों ने कहा- ‘बंगाल बन रहा बांग्लादेश जैसा’
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संवाद 24 दिल्ली। बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा का असर अब पश्चिम बंगाल की राजनीति और सड़कों पर साफ नजर आने लगा है। हाल के दिनों में बांग्लादेश के अलग-अलग जिलों में 6 हिंदुओं की हत्या के बाद कोलकाता समेत कई इलाकों में बंगाली हिंदुओं ने विरोध प्रदर्शन किए। केवल कोलकाता में ही करीब 10 हजार लोग सड़कों पर उतरे।
मैमनसिंह की घटना से भड़का आक्रोश
18 दिसंबर 2025 की रात बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू दास को भीड़ ने ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला था। इसके बाद शव को फैक्ट्री से दूर ले जाकर जला दिया गया। इसी घटना के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहराई।
इस घटना के विरोध में 23 दिसंबर को कोलकाता में बड़ा प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों जैसे हालात धीरे-धीरे पश्चिम बंगाल में भी बनते जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों के आरोप
74 वर्षीय नकुल भट्टाचार्जी ने कहा,
“दीपू दास को जिंदा जला दिया गया। इससे भयावह क्या हो सकता है? ऐसा मेरे बेटे के साथ भी हो सकता है। बांग्लादेश में जैसे हिंदुओं को टॉर्चर किया जा रहा है, बंगाल में हालात अलग नहीं हैं। पश्चिम बंगाल बांग्लादेश का डुप्लीकेट बनता जा रहा है।”
वहीं 29 वर्षीय संगीता ने आरोप लगाया कि
“राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठ और कट्टरपंथियों को संरक्षण मिल रहा है, जिससे माहौल बिगड़ रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए।”
पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद
प्रदर्शन में शामिल नीति भट्टाचार्जी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा,
“हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। फिर भी पुलिस ने हमें रोका, लाठीचार्ज किया और 19 लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें 7 महिलाएं थीं। महिलाओं के बाल खींचे गए, एक साथी की नाक टूट गई।”
नीति का दावा है कि प्रदर्शन के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी, इसके बावजूद दोपहर 3 बजे ही लोगों को हिरासत में ले लिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से मोबाइल फोन के पासवर्ड मांगे और परिजनों से संपर्क को लेकर दबाव बनाया।
चुनावी माहौल में बढ़ी हलचल
पश्चिम बंगाल में मार्च-अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा और उससे जुड़ा असंतोष बंगाल की राजनीति में एक बड़ा विषय बनता जा रहा है।
प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे।






