ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से क्या बदल जाएगा अमेरिका और दुनिया का व्यापार?
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संवाद 24 दिल्ली। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय 9 जनवरी 2026 को डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ की कानूनी वैधता पर फैसला सुनाने जा रहा है। यह मामला न केवल अमेरिका की व्यापार नीति के लिए अहम है, बल्कि वैश्विक बाजारों और द्विपक्षीय रिश्तों पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है। यह फैसले की दहलीज पर खड़ा मुद्दा व्यापार, कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को सीधे प्रभावित करता है।
क्या है विवाद का केंद्र?
ट्रम्प प्रशासन ने 2025 में कई देशों के आयात पर भारी‑भरकम शुल्क लगाए। ये टैरिफ 10% से लेकर 50% तक थे, जिनका उद्देश्य था घरेलू उद्योग की सुरक्षा और व्यापार घाटे में कमी। प्रशासन ने यह कदम उठाने के लिए 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियाँ कानून (IEEPA) का हवाला दिया, जो राष्ट्रपति को “असाधारण परिस्थितियों” में विदेशी व्यापार को नियंत्रित करने की शक्ति देता है। लेकिन आलोचक सवाल उठाते हैं कि क्या IEEPA के तहत राष्ट्रपति के पास इतनी व्यापक शक्ति है या यह केवल सीमित आपात स्थितियों तक ही सीमित होनी चाहिए।
न्यायालय तक मामला कैसे पहुँचा?
निचली अदालतों ने ट्रंप के इस कदम को अधिकार की सीमा से बाहर माना और फैसला दिया कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
इसके बाद प्रभावित व्यापार समूहों और अधिकारियों ने इस फैसले के खिलाफ अपील की। उनका तर्क था कि राष्ट्रपति को यह शक्ति आपातकाल में विदेशी व्यापार को नियंत्रित करने के लिए दी गई थी।
न्यायाधीशों का रुख क्या है?
सुनवाई के दौरान कुछ न्यायाधीशों ने ट्रंप प्रशासन की व्याख्या पर कठोर सवाल उठाए। उनका फोकस यह देखने पर था कि क्या राष्ट्रपति को वास्तव में इतने व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार मिला या यह संविधान के दायरे के बाहर है। विशेष रूप से यह सवाल अहम है कि टैरिफ ‘नियमन’ हैं या ‘कर/टैक्स’, क्योंकि केवल कांग्रेस को टैक्स लगाने का अधिकार संविधान देता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
यदि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के पक्ष में फैसला नहीं देता, तो इसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा। ऐसे टैरिफ रद्द होने या सीमित होने से कई देशों को अपने व्यापारिक समझौतों और रणनीतियों को बदलना पड़ सकता है। टैरिफों से अमेरिका को संभावित रूप से 600 अरब डॉलर का राजस्व मिलने का अनुमान था, हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार वास्तविक आंकड़ा इससे कम हो सकता है।
भारत और अन्य देशों पर प्रभाव
भारत सहित कई देशों के निर्यातक अमेरिका में अपने उत्पादों की प्रतिस्पर्धा को प्रभावित होते देख रहे हैं। भारत के लिए यह टैरिफ 25% से 50% तक थे, जिसने व्यापार समझौतों और द्विपक्षीय वार्ताओं को चुनौतीपूर्ण बना दिया। निर्यातकों के लिए यह बदलाव अमेरिकी बाजार में रणनीति, कीमतों और उत्पाद वितरण पर सीधे असर डालता है।
आगे क्या होने वाला है?
9 जनवरी को कोर्ट अपना अंतिम निर्णय सुनाएगा। यदि न्यायालय कह देता है कि राष्ट्रपति को इतने व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं था, तो यह अमेरिका की कार्यपालिका और कांग्रेस के बीच शक्ति संतुलन में बदलाव ला सकता है। वहीं, अगर अदालत ट्रंप के पक्ष में फैसला देती है, तो यह नीतिगत रूप से सरकारों को विदेश व्यापार नियंत्रित करने में अधिक अधिकार देगा और वैश्विक बाजार संरचना को प्रभावित करेगा।






