‘अगला सचिन तैयार है!’ 14 साल के वैभव सूर्यवंशी पर श्रीकांत का बड़ा बयान, सीधे टीम इंडिया में मौका देने की मांग
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट को एक और चमत्कारी प्रतिभा मिलती दिख रही है। महज 14 साल की उम्र में विजय हजारे ट्रॉफी में तूफानी बल्लेबाजी से तहलका मचाने वाले Vaibhav Suryavanshi को लेकर अब सीनियर टीम में शामिल करने की मांग उठने लगी है। पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज चयनकर्ता Krishnamachari Srikkanth ने वैभव की तुलना महान Sachin Tendulkar से करते हुए बीसीसीआई से उन्हें जल्द मौका देने की जोरदार वकालत की है।
श्रीकांत का कहना है कि जिस तरह सचिन तेंदुलकर ने कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखकर दुनिया को चौंकाया था, उसी तरह वैभव सूर्यवंशी में भी असाधारण प्रतिभा और बड़े मंच पर टिकने की काबिलियत साफ नजर आती है।
विजय हजारे में रिकॉर्डतोड़ पारी
वैभव सूर्यवंशी ने विजय हजारे ट्रॉफी में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उन्होंने एक मुकाबले में सिर्फ 84 गेंदों पर 190 रन ठोक दिए, जिसमें 15 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। खास बात यह रही कि उन्होंने अपना शतक महज 36 गेंदों में पूरा कर लिया, जिससे वह लिस्ट-ए क्रिकेट के सबसे युवा शतकवीर बन गए। इस पारी ने गेंदबाजों को पूरी तरह बेबस कर दिया और चयनकर्ताओं के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
‘उम्र नहीं, क्षमता देखी जानी चाहिए’
अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए श्रीकांत ने उन आलोचकों को भी करारा जवाब दिया, जो उम्र और अनुभव का हवाला देकर वैभव को रोकने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बल्लेबाज हर स्तर पर रन बना रहा है—चाहे अंडर-19 क्रिकेट हो या बड़े घरेलू मुकाबले।
श्रीकांत के मुताबिक, “अगर कोई खिलाड़ी लगातार प्रदर्शन कर रहा है, तो सिर्फ उम्र के कारण उसे नजरअंदाज करना गलत होगा।”
आंकड़े भी दे रहे हैं गवाही
वैभव सूर्यवंशी के आंकड़े उनकी प्रतिभा की मजबूती से पुष्टि करते हैं। यूथ वनडे में 15 मैचों में उनका औसत 51 से अधिक और स्ट्राइक रेट करीब 159 का है। इतनी कम उम्र में यह आंकड़े भविष्य के बड़े सुपरस्टार की ओर इशारा करते हैं। श्रीकांत का मानना है कि वैभव की तकनीक मजबूत है, वह दबाव में शांत रहता है और बड़े शॉट खेलने से नहीं हिचकता।
टीम इंडिया के लिए भविष्य की उम्मीद
श्रीकांत ने सुझाव दिया कि सफेद गेंद के क्रिकेट में वैभव को वही मौका दिया जाना चाहिए, जैसा कभी युवा सचिन तेंदुलकर को मिला था। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस प्रतिभा को तराशा गया, तो आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट को एक और ‘किंग’ मिल सकता है।
फिलहाल चयनकर्ताओं का फैसला बाकी है, लेकिन इतना तय है कि विजय हजारे ट्रॉफी में वैभव सूर्यवंशी ने अपने बल्ले से यह संदेश दे दिया है—भविष्य ने दस्तक दे दी है।






