टीम इंडिया के तूफानी बल्लेबाज़ रिंकू सिंह पर टूटी दुख और दृढ़ता की दोहरी परीक्षा
Share your love

संवाद 24 डेस्क। भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते सितारे Rinku Singh के जीवन में ऐसा दर्दनाक पल आया है, जिसने पूरे खेल जगत को भावुक कर दिया। उनके पिता खानचंद सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इस खबर ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों को भी स्तब्ध कर दिया है।
लंबी बीमारी के बाद थमा जीवन का संघर्ष
परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, रिंकू के पिता पिछले काफी समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। परिवार में शोक का माहौल है और घर पर लोगों का तांता लगा हुआ है।
क्रिकेट कैंप छोड़ बेटे ने निभाया फर्ज
बताया जा रहा है कि जब पिता की तबीयत ज्यादा बिगड़ी, तो रिंकू सिंह ने तुरंत क्रिकेट प्रतिबद्धताओं से विराम लिया और परिवार के पास लौट आए। यह फैसला दर्शाता है कि उनके लिए परिवार हमेशा पहली प्राथमिकता रहा है। खेल से ऊपर अपने पिता के साथ खड़ा होना उनके संस्कारों की झलक देता है।
संघर्षों से बना स्टार, पिता थे सबसे बड़े सहारा
रिंकू सिंह का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। साधारण परिवार से आने वाले इस खिलाड़ी ने सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा। उनके पिता ने कठिन परिस्थितियों में भी परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं और बेटे के क्रिकेट करियर को समर्थन दिया। यही वजह है कि रिंकू कई बार सार्वजनिक मंचों पर अपने पिता को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बता चुके हैं।
भावुक हुआ क्रिकेट जगत
जैसे ही यह खबर सामने आई, क्रिकेट जगत से संवेदनाओं की बाढ़ आ गई। साथी खिलाड़ियों, पूर्व क्रिकेटरों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। हर कोई इस कठिन घड़ी में रिंकू और उनके परिवार के साथ खड़ा नजर आया।
मैदान के हीरो, जिंदगी की सच्चाई से सामना
मैदान पर शांत स्वभाव और विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले रिंकू सिंह इस समय निजी जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। खेल के चमकदार मंच के पीछे एक संवेदनशील इंसान भी होता है, यह घटना उसी सच्चाई को सामने लाती है।
फैंस की दुआएं और उम्मीदें
देशभर के क्रिकेट प्रेमी रिंकू के लिए दुआ कर रहे हैं कि वे इस दुख से उबर सकें। उनके प्रशंसकों का मानना है कि पिता की यादें और आशीर्वाद ही उन्हें आगे और मजबूत बनाएंगे।
एक खालीपन जो कभी नहीं भरेगा
पिता का जाना किसी भी संतान के लिए अपूरणीय क्षति होती है। रिंकू सिंह के जीवन में यह खालीपन हमेशा रहेगा, लेकिन उनके पिता ने जिस हौसले और मेहनत की सीख दी, वही उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देगी। इस दुखद क्षण ने एक बार फिर याद दिलाया है कि खिलाड़ी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, जीवन की सच्चाइयों से कोई अछूता नहीं रहता।






