107 रन से करारी हार, लेकिन आख़िरी जोड़ी ने रच दिया इतिहास, टी20 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे का फाइट बैक बना चर्चा का विषय

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संवाद 24 डेस्क। टी20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 मुकाबले में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में ऐसा मैच देखने को मिला, जिसमें जीत तो एकतरफा रही, लेकिन कहानी आखिरी पलों में पलट गई। वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 254 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में जिम्बाब्वे की टीम लक्ष्य का दबाव झेल नहीं पाई और 147 रन पर सिमट गई। 107 रन की इस बड़ी हार ने स्कोरबोर्ड पर भले अंतर दिखाया, लेकिन मुकाबले का आखिरी हिस्सा इतिहास में दर्ज हो गया।

254 रन का पहाड़, कैरेबियाई बल्लेबाजों का कहर
वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाए। पावरप्ले में तेज रनगति ने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों को बैकफुट पर ला दिया। मध्य ओवरों में भी चौके-छक्कों की बरसात जारी रही। टीम के स्टार बल्लेबाज ने 80 से ज्यादा रन की धमाकेदार पारी खेलकर मैच की दिशा तय कर दी। हर ओवर में रनगति बढ़ती गई और देखते ही देखते स्कोर 250 के पार पहुंच गया। मैदान के चारों ओर गेंद उड़ती रही और दर्शक कैरेबियाई अंदाज का लुत्फ उठाते रहे।

लक्ष्य का दबाव और लड़खड़ाती शुरुआत
इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं था। जिम्बाब्वे की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। शुरुआती ओवरों में ही विकेट गिरने लगे और टीम दबाव में आ गई। बल्लेबाज बड़ी साझेदारी बनाने में नाकाम रहे। रनगति बढ़ाने की कोशिश में विकेट गंवाए गए और स्कोरबोर्ड पर बढ़ता अंतर साफ दिखाई देने लगा। आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी और जीत की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी।

जब मैच हो गया था तय
16वें ओवर तक मुकाबला पूरी तरह वेस्टइंडीज के कब्जे में था। जिम्बाब्वे का स्कोर 100 के आसपास था और नौ विकेट गिर चुके थे। ऐसा लग रहा था कि मैच जल्द ही खत्म हो जाएगा। दर्शकों का ध्यान भी परिणाम से ज्यादा जीत के अंतर पर था। लेकिन तभी मैदान पर कुछ ऐसा हुआ जिसने सबका ध्यान खींच लिया।

आखिरी जोड़ी का बेमिसाल जवाब
दसवें विकेट के लिए ब्रैड इवांस और रिचर्ड नगारवा क्रीज पर आए। आमतौर पर इस चरण पर बल्लेबाजी औपचारिकता भर रह जाती है, लेकिन इन दोनों ने इरादे कुछ और ही दिखाए। इवांस ने आक्रामक अंदाज में गेंदबाजों पर हमला बोला। उन्होंने चौके-छक्कों की झड़ी लगा दी। नगारवा ने भी मजबूती से उनका साथ दिया। दोनों ने मिलकर 44 रन जोड़ दिए, जो टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में दसवें विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी बन गई।

ब्रैड इवांस का तूफानी अंदाज
इवांस ने महज 21 गेंदों में 40 से ज्यादा रन ठोक दिए। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास झलक रहा था। उन्होंने बड़े शॉट खेलने से परहेज नहीं किया। आखिरी ओवरों में लगातार छक्के लगाकर उन्होंने स्टेडियम का माहौल बदल दिया। भले ही टीम हार की ओर बढ़ रही थी, लेकिन उनकी बल्लेबाजी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

नगारवा का धैर्य और साझेदारी की अहमियत
रिचर्ड नगारवा ने कम गेंदें खेलीं, लेकिन विकेट बचाकर रखा। उन्होंने स्ट्राइक रोटेट की और इवांस को खुलकर खेलने का मौका दिया। यही संतुलन इस रिकॉर्ड साझेदारी की कुंजी बना। जब दसवां विकेट 44 रन जोड़ देता है, तो वह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि जुझारूपन की मिसाल बन जाता है।

हार के बीच उम्मीद की किरण
107 रन की हार निश्चित ही जिम्बाब्वे के लिए निराशाजनक रही। लेकिन आखिरी जोड़ी की यह साझेदारी टीम के लिए मनोबल बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। बड़े टूर्नामेंट में ऐसे पल खिलाड़ियों को आत्मविश्वास देते हैं। यह संदेश भी गया कि जिम्बाब्वे अंत तक लड़ने वाली टीम है।

वेस्टइंडीज का दबदबा कायम
दूसरी ओर, वेस्टइंडीज ने इस जीत के साथ सुपर-8 में अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। बल्लेबाजी की गहराई और गेंदबाजी की धार ने उन्हें खिताब का प्रबल दावेदार बना दिया है। टीम का आत्मविश्वास चरम पर नजर आ रहा है और आगे के मुकाबलों में उनका आक्रामक अंदाज देखने को मिल सकता है।

रिकॉर्ड जो रहेगा याद
टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर 10वें विकेट के लिए 44 रन की साझेदारी अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। आमतौर पर आखिरी विकेट जल्दी गिर जाता है, लेकिन यहां कहानी अलग रही। यह रिकॉर्ड आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा और इस मैच को सिर्फ हार या जीत से नहीं, बल्कि इस अनोखी साझेदारी से पहचाना जाएगा।
यह मुकाबला भले ही स्कोरबोर्ड पर एकतरफा दिखा, लेकिन क्रिकेट की खूबसूरती यही है कि आखिरी गेंद तक कुछ भी हो सकता है। जिम्बाब्वे की आखिरी जोड़ी ने यही साबित किया, हार में भी इतिहास लिखा जा सकता है।

Manvendra Somvanshi
Manvendra Somvanshi

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