मोबाइल कॉलिंग में क्रांति? CNAP के बाद हर फोन पर आएगा KYC वाला असली नाम, कैसे बदलने वाला है भारत में इनकमिंग कॉल का अनुभव?
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संवाद 24 डेस्क। भारत में मोबाइल कॉलिंग का तरीका जल्द ही बदलने वाला है! दूरसंचार उद्योग में एक बड़ा परिवर्तन Calling Name Presentation (CNAP) नामक नए फीचर के रोलआउट के साथ हो रहा है, जो उपयोगकर्ताओं को इनकमिंग कॉल पर केवल नंबर नहीं, बल्कि कॉल करने वाले का असली नाम भी दिखाएगा। यह बदलाव तकनीक और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर प्रभाव डालेगा और स्पैम कॉल्स के प्रबंधन के तरीके को बदल सकता है।
CNAP क्या है? टेक्नोलॉजी का एक नया अध्याय
CNAP (Calling Name Presentation) वह तकनीक है जिससे आपके फोन पर जब भी कोई कॉल आएगी, तो कॉलर का नाम सीधे स्क्रीन पर दिखाई देगा, वो नाम जो उस व्यक्ति के सिम के रजिस्टर्ड KYC दस्तावेजों में दर्ज है। अक्सर लोग अनजान नंबर से कॉल आते ही यह सोचते हैं कि “यह कौन होगा?” और उसके बाद ही फोन उठाते हैं। CNAP के साथ यह झंझट आसान हो जाएगी, क्योंकि अब आपको कॉल उठाने से पहले ही पता चल जाएगा कि कॉलर का वेरिफाइड नाम क्या है, वो भी बिना किसी थर्ड-पार्टी ऐप के।
मुख्य बात: यह फीचर एप-आधारित कॉलर ID (जैसे Truecaller) की तुलना में नेटवर्क-लेवल है, यानी यह सीधे आपके मोबाइल नेटवर्क डेटा से काम करेगा, न कि इंटरनेट या कॉन्टैक्ट सिंक पर निर्भर होकर।
कार्य कैसे करता है CNAP?
CNAP एकदम सादगी के साथ काम करता है: जब कोई कॉल करता है, कॉलर का नाम सिम के रजिस्टर्ड KYC रिकॉर्ड से लिया जाता है। यह नाम नेटवर्क के जरिए आपके फोन तक भेजा जाता है। आपका फोन उसी नाम को कॉलर ID के रूप में स्क्रीन पर दिखाता है।
इसका मतलब है कि आपको किसी ऐप को इंस्टॉल या अनुमति देने की ज़रूरत नहीं होती नाम सीधे नेटवर्क से आता है। यह सिस्टम 2025 में धीरे-धीरे कई नेटवर्क पर लाइव टेस्ट और रोलआउट हो चुका है, और आने वाले महीनों में इसे और ज़्यादा क्षेत्रों में लागू किया जाने की उम्मीद है।
CNAP और Truecaller में क्या अंतर?
भारत में पिछले कई सालों से Truecaller जैसी सेवाएँ अनजान नंबरों के कॉलर्स के नाम दिखाती आई हैं। लेकिन CNAP के आने से यह तस्वीर बदलने वाली है:
???? Truecaller:
थर्ड-पार्टी ऐप – कॉन्टैक्ट, यूज़र रिपोर्टिंग, डेटा बेस पर आधारित
स्पैम पहचान और ब्लॉकिंग के लिए AI और कम्युनिटी डाटा का इस्तेमाल करता है।
???? CNAP:
नेटवर्क-लेवल फीचर – सिम कार्ड KYC डेटा से सीधा नाम दिखाता है, ऐप इंस्टॉल करने की ज़रूरत नहीं, नाम तो दिखाता है, लेकिन स्पैम कॉल्स को ब्लॉक नहीं करता
आसान शब्दों में कहें तो CNAP आपको “कॉल किसका है” बताता है, जबकि Truecaller आपको “यह कॉल सुरक्षित है या नहीं” भी दर्शाता है यानी दोनों की भूमिका अलग-अलग है।
भारत में CNAP का रोलआउट
टेलीकॉम कंपनियाँ जैसे Reliance Jio, Vodafone Idea (Vi) और अन्य ने CNAP को विभिन्न सर्किलों में लागू करना शुरू कर दिया है। कुछ क्षेत्रों में यह पहले से ही लाइव है, और कई और स्थानों पर क्रमिक रोलआउट जारी है। CNAP फिलहाल 4G/5G नेटवर्क पर अधिक प्रभावी होता दिख रहा है, और धीरे-धीरे 2G नेटवर्क तक भी इसे विस्तारित करने की योजना है।
भविष्य में क्या बदलाव आएंगे?
सरकार समेत TRAI और DoT के निर्देशों के मुताबिक CNAP को डिफ़ॉल्ट फीचर के रूप में लागू करने की कोशिश की जा रही है, ताकि यूजर को कोई अलग सेटिंग या एक्टिवेशन न करना पड़े।
आगामी 2026 में SIM-Binding जैसे नियम भी लागू होने की बात है, जिससे कॉल और मैसेजिंग दोनों में सुरक्षा और पहचान और मज़बूत होगी।
CNAP के फायदे (क्या उपयोगकर्ता पाएँगे?)
सही पहचान: अब आपको अनजान नंबर के सामने केवल नंबर नहीं, बल्कि वेरिफाइड नाम दिखाई देगा।
कोई ऐप नहीं चाहिए: यह नेटवर्क-लेवल फीचर है, आपको Truecaller जैसे किसी ऐप को इंस्टॉल या अनुमति देने की ज़रूरत नहीं होगी।
कम कन्फ्यूज़न: पहले कॉलर का नाम मुख्यतः आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट पर आधारित दिखता था या ऐप का डेटाबेस उपयोग होता था। CNAP में यह सिम रजिस्टर्ड नाम होने से कम भ्रम रहेगा।
सीमाएँ भी हैं, जानना ज़रूरी
???? स्पैम कॉल्स रोकने में CNAP मदद नहीं करेगा, यह सिर्फ कॉल को पहचानने का नाम दिखाता है, जैसे ही नाम दिख रहा है, फिर भी स्पैम या धोखाधड़ी कॉल हो सकता है।
???? नाम अपडेट समस्या, अगर सिम पर पुराना नाम है, या फ़ोन SIM पुरानी जानकारी से जुड़ा है, तो CNAP वही पुराना नाम दिखा सकता है।
???? सही नेटवर्क समर्थन, सभी नेटवर्क और सभी इलाकों में अभी CNAP सपोर्ट नहीं है, यह क्रमिक रोलआउट के साथ विस्तारित हो रहा है।
उपयोगकर्ता अनुभव पहला प्रभाव
कुछ उपयोगकर्ताओं ने पहले से CNAP लगे हुए क्षेत्रों में कहा है कि यह फीचर दिलचस्प है, परंतु इसे बिना स्पैम पहचान के देखना चाहिए, क्योंकि नाम दिखना सहज तो है, लेकिन यह सुरक्षित कॉल का भरोसा नहीं देता।
CNAP का टेक्निकल सार
CNAP कॉलर ID को SIM के KYC रिकॉर्ड से जोड़ता है और इसे कॉल इनकमिंग के समय नेटवर्क के जरिए भेजता है। यह सिस्टम उन दस्तावेजों पर आधारित होता है जिन्हें सिम जारी करते समय टेलीकॉम कंपनियों ने सत्यापित किया था।
अंततः हम कह सकते हैं कि भारत में Calling Name Presentation (CNAP) तकनीक आने से फोन कॉलिंग का अनुभव बदल रहा है, कम से कम पहचान की दृष्टि से निश्चित रूप से इस फीचर का बड़ा प्रभाव दिखेगा। यह फीचर उपयोगकर्ताओं को यह जानने में मदद करेगा कि कॉल किसका है, जिससे अनजान नंबरों के संदर्भ में निर्णय लेना आसान होगा। फिर भी, स्पैम और धोखाधड़ी कॉल्स से बचने के लिए अन्य तकनीकों या ऐप्स की मदद अभी भी जरूरी रह सकती है, क्योंकि CNAP केवल नाम पहचान प्रदान करता है, जो कॉल सुरक्षित है, इसका प्रमाण नहीं।






