LLM मार्केट में भारत की बादशाहत: गूगल से लेकर OpenAI तक, हर दिग्गज के लिए ‘नंबर 1’ बना हिंदुस्तान

संवाद 24 डेस्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक दौड़ में भारत ने एक ऐसी छलांग लगाई है जिसने दुनिया के विकसित देशों, विशेषकर अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। नवीनतम आंकड़ों और बाजार विश्लेषणों के अनुसार, भारत अब ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स’ (LLMs) जैसे कि ChatGPT और Gemini के लिए दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सक्रिय बाजार बन चुका है। यह बदलाव न केवल तकनीक के प्रति भारतीयों की रुचि को दर्शाता है, बल्कि भारत को दुनिया के सबसे बड़े ‘AI टेस्ट-बेड’ के रूप में भी स्थापित कर चुका है।

डेटा और आबादी: भारत का नया ‘फ्यूल’
भारत की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां की विशाल इंटरनेट आबादी और दुनिया में सबसे सस्ता डेटा होना है। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) की हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारत अब लार्ज लैंग्वेज मॉडल अपनाने के मामले में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या लगभग 75 करोड़ के पार पहुंच गई है, जिनमें से 60 प्रतिशत से अधिक की आयु 35 वर्ष से कम है। यह युवा पीढ़ी नई तकनीकों को तेजी से अपनाने में माहिर है, जिसके कारण ChatGPT, Gemini और Perplexity जैसे टूल्स की पहुंच हर घर तक हो गई है।

आंकड़ों में भारत की बादशाहत
अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत की स्थिति चौंकाने वाली है। OpenAI के प्रमुख टूल ChatGPT के कुल वैश्विक आधार का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से आता है। जुलाई 2024 तक भारत में इसके डाउनलोड्स का आंकड़ा 2.4 करोड़ को पार कर गया था। वहीं, Google के Gemini के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है, जहां इसके कुल मासिक एक्टिव यूजर्स का 30 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है। सर्च-आधारित AI ‘Perplexity’ के मामले में तो यह भागीदारी और भी अधिक है, जहां इसके 38 प्रतिशत मंथली एक्टिव यूजर्स भारतीय हैं। प्रतिदिन के सक्रिय यूजर्स (DAUs) के मामले में भी भारत ने अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों को बहुत पीछे छोड़ दिया है।

टेलीकॉम कंपनियों की भूमिका और ‘डेमोक्रेटाइजेशन’
​भारत के AI बाजार में अचानक आई इस तेजी के पीछे रिलायंस जियो (Jio) और भारती एयरटेल (Airtel) का बहुत बड़ा हाथ है। इन कंपनियों ने AI को केवल एक ‘ऐप’ के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘सेवा’ के रूप में पेश किया है।
​बंडलिंग मॉडल: जिस तरह कभी नेटफ्लिक्स और हॉटस्टार के सब्सक्रिप्शन डेटा प्लान के साथ मिलते थे, अब वही मॉडल AI के लिए अपनाया जा रहा है। जियो द्वारा ‘जेमिनी प्रो’ और एयरटेल द्वारा ‘परप्लेक्सिटी प्रो’ का एक्सेस अपने प्रीमियम ग्राहकों को देना एक क्रांतिकारी कदम है।
​ग्रामीण पहुंच: इन टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क के कारण AI अब केवल दिल्ली-मुंबई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिहार के गांवों और पूर्वोत्तर के पहाड़ों तक पहुंच गया है।
इसे तकनीक का ‘लोकतांत्रीकरण’ (Democratization) कहा जा रहा है, जहां तकनीक अब केवल संभ्रांत वर्ग तक सीमित नहीं रही।

ग्लोबल दिग्गजों के लिए ‘टेस्ट-बेड’ क्यों है भारत?
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक ‘लाइव प्रयोगशाला’ बन गया है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई जैसे दिग्गजों के लिए भारतीय डेटा और फीडबैक लूप उनके मॉडल्स को प्रशिक्षित (Train) करने का सबसे बड़ा जरिया बन गए हैं।

टेस्ट-बेड’ का अर्थ और भारत की विशिष्टता
​जब हम भारत को दुनिया का सबसे बड़ा ‘AI टेस्ट-बेड’ कहते हैं, तो इसका मतलब यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनियां अपने नए फीचर्स, एल्गोरिदम और मॉडल्स को सबसे पहले भारत में ‘टेस्ट’ कर रही हैं। इसके तीन प्रमुख कारण हैं:
​अ) भाषाई विविधता (Linguistic Diversity)
​भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं और हजारों बोलियां हैं। अगर कोई AI मॉडल भारत की भाषाई जटिलता को समझ लेता है, तो वह दुनिया के किसी भी कोने में सफल हो सकता है। इसीलिए, कंपनियां अपने मॉडल्स को ‘बहुभाषी क्षमता’ (Multilingual capabilities) देने के लिए भारतीय डेटा का उपयोग कर रही हैं।
​ब) विविध उपयोग-मामले (Diverse Use Cases)
​भारत में एक छात्र AI का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कर रहा है, तो एक किसान अपनी फसल की बीमारी पहचानने के लिए। एक छोटा दुकानदार अपने स्टॉक मैनेजमेंट के लिए AI इस्तेमाल कर रहा है। यह विविधता किसी अन्य देश में उपलब्ध नहीं है, जिससे कंपनियों को अपने मॉडल्स को ‘रिफाइन’ करने का मौका मिलता है।
स) डेटा की प्रचुरता और कम लागत
​AI मॉडल्स को सीखने के लिए डेटा की जरूरत होती है। भारत में दुनिया का सबसे सस्ता डेटा उपलब्ध है, जिसके कारण भारतीय यूजर्स दिन-रात इन टूल्स के साथ ‘इंटरैक्ट’ करते हैं। यह ‘फीडबैक लूप’ AI को स्मार्ट बनाने में ईंधन का काम करता है।

एजेंटिक AI’ का अगला पड़ाव
भारत की इस स्थिति ने इसे ‘एजेंटिक AI’ (Agentic AI) के परीक्षण के लिए दुनिया का सबसे आदर्श स्थान बना दिया है। एजेंटिक AI वे सिस्टम हैं जो केवल बातचीत नहीं करते, बल्कि स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकते हैं, योजना बना सकते हैं और कार्यों को निष्पादित कर सकते हैं। भारत के विविध उपयोग-मामलों (Use Cases) और विशाल डेटाबेस के कारण, भविष्य के इन जटिल AI सिस्टम्स का असली ‘स्ट्रेस टेस्ट’ यहीं होने वाला है। यह वह चरण है जहाँ AI केवल सवालों के जवाब नहीं देगा, बल्कि आपके लिए काम भी करेगा, ​जैसे कि –
​आपके लिए फ्लाइट टिकट बुक करना।
​आपके बैंक अकाउंट्स को मैनेज करना।
​बिजनेस मीटिंग्स को ऑटो-शेड्यूल करना।
​भारत की जटिल अर्थव्यवस्था और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे UPI) इस एजेंटिक AI के सफल परीक्षण के लिए सबसे उपयुक्त धरातल प्रदान करते हैं।

चुनौतियां और स्टार्टअप इकोसिस्टम
ये स्थिति कुछ चुनौतियां भी पेश करती है। ​जैसे-जैसे AI की पैठ बढ़ रही है, कुछ गंभीर सवाल लगातार उठ रहे हैं, जैसे
​डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty): क्या भारतीयों का डेटा विदेशी सर्वरों पर सुरक्षित है?
​डीपफेक और भ्रामक जानकारी: भारत जैसे संवेदनशील समाज में AI जनित फेक न्यूज एक बड़ी चुनौती है।
​रोजगार पर प्रभाव: क्या AI भारतीय युवाओं की नौकरियों को खा जाएगा या नए अवसर पैदा करेगा?
इसके अलावा वैश्विक कंपनियों के मुफ्त या सस्ते सब्सक्रिप्शन मॉडल के कारण घरेलू AI स्टार्टअप्स के लिए बाजार में टिकना मुश्किल हो सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि ग्लोबल दिग्गजों की आक्रामक मार्केटिंग रणनीति भारतीय स्टार्टअप्स के विकास में बाधा बन सकती है और डेटा सुरक्षा एवं एथिकल AI जैसे मुद्दों पर भी भारत को सख्त कानून बनाने की आवश्यकता होगी।

भविष्य की राह
भारत का AI बाजार 2025 तक 13 बिलियन डॉलर और 2031 तक 31.94 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। ​भारत सरकार ने AI की महत्ता को पहचानते हुए ‘IndiaAI Mission’ के तहत 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया है। इसका उद्देश्य भारत में ही ‘कंप्यूटिंग पावर’ (GPU Clusters) स्थापित करना है, ताकि हमें डेटा प्रोसेसिंग के लिए विदेशी सर्वरों पर निर्भर न रहना पड़े। सरकार की नीति स्पष्ट है, भारत को AI का केवल यूजर नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरर बनाना। जिस तरह भारत ने UPI के जरिए डिजिटल भुगतान में दुनिया को राह दिखाई थी, ठीक उसी तरह अब AI मॉडल अपनाने और उन्हें वैश्विक स्तर पर टेस्ट करने के मामले में भारत एक ‘विश्व गुरु’ की भूमिका में नजर आ रहा है।

भारत अब केवल तकनीक का उपभोग करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह तकनीक को आकार देने वाला देश बन गया है। आज जब दुनिया के बड़े देशों की निगाहें भारत पर टिकी हैं, तो यह स्पष्ट है कि हम एक ‘AI सुपरपावर’ बनने की राह पर हैं। अमेरिका को बाजार के मामले में पीछे छोड़ना केवल शुरुआत है। भारत का लक्ष्य अब ऐसे AI मॉडल्स विकसित करना है जो मानवता की सेवा करें, शिक्षा को सुलभ बनाएं और स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति लाएं। ​भारत का ‘टेस्ट-बेड’ बनना इस बात का प्रतीक है कि भविष्य की तकनीक का रास्ता अब वाशिंगटन या बीजिंग से नहीं, बल्कि नई दिल्ली के डिजिटल गलियारों से होकर गुजरेगा और आने वाले दशक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य सिलिकॉन वैली के साथ-साथ भारत के बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली जैसे शहरों से भी तय होगा।

Samvad 24 Office
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