रेयर अर्थ मैग्नेट: आधुनिक तकनीक की रीढ़ और भारत के आत्मनिर्भर बनने का रोडमैप

संवाद 24 डेस्क। आज की भागती दौड़ती दुनिया में हम जिस ‘हरित क्रांति’ और ‘डिजिटल युग’ की बात करते हैं, उसकी अदृश्य शक्ति दरअसल कुछ विशिष्ट खनिजों में छिपी है। इन्हें ‘रेयर अर्थ मैग्नेट’ (Rare Earth Magnets) कहा जाता है। स्मार्टफोन की थ्रिलिंग वाइब्रेशन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार और पवन चक्कियों से पैदा होने वाली बिजली तक, यह सब इन शक्तिशाली चुंबकों की बदौलत संभव है। जैसे-जैसे दुनिया जीवाश्म ईंधन से हटकर स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है, रेयर अर्थ मैग्नेट का महत्व किसी भी देश की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए ‘नया तेल’ (New Oil) बन गया है।

रेयर अर्थ मैग्नेट क्या होते हैं?
रेयर अर्थ मैग्नेट स्थायी चुंबक (Permanent Magnets) होते हैं जो आवर्त सारणी (Periodic Table) के ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ (REE) के मिश्र धातुओं से बने होते हैं। हालांकि इनके नाम में ‘रेयर’ यानी दुर्लभ शब्द जुड़ा है, लेकिन ये तत्व पृथ्वी की पपड़ी में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इन्हें ‘दुर्लभ’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन्हें शुद्ध रूप में निकालना और संसाधित (Process) करना तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल और पर्यावरण के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।

मुख्य रूप से दो प्रकार के रेयर अर्थ मैग्नेट सबसे अधिक प्रचलित हैं:
नियोडिमियम मैग्नेट (NdFeB): यह नियोडिमियम, आयरन और बोरान का मिश्रण है। यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली व्यावसायिक चुंबक है।
समेरियम-कोबाल्ट मैग्नेट (SmCo): यह उच्च तापमान पर भी अपनी चुंबकीय शक्ति नहीं खोता, इसलिए इसका उपयोग सैन्य और अंतरिक्ष अभियानों में अधिक होता है।

आज के समय में इनकी उपयोगिता: एक अपरिहार्य आवश्यकता
आधुनिक अर्थव्यवस्था में रेयर अर्थ मैग्नेट की उपयोगिता को निम्नलिखित क्षेत्रों के माध्यम से समझा जा सकता है:
इलेक्ट्रिक वाहन (EV): ईवी मोटर्स को हल्का और शक्तिशाली बनाने के लिए नियोडिमियम मैग्नेट अनिवार्य हैं। टेस्ला से लेकर टाटा मोटर्स तक, सभी प्रमुख कंपनियां इन पर निर्भर हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा: बड़ी पवन चक्कियों (Wind Turbines) के जनरेटरों में भारी मात्रा में इन चुंबकों का उपयोग होता है ताकि कम हवा में भी अधिक बिजली पैदा की जा सके।
इलेक्ट्रॉनिक्स: आपके स्मार्टफोन के स्पीकर, माइक्रोफोन, हार्ड ड्राइव और कैमरों के ऑटो-फोकस सेंसर बिना इन चुंबकों के काम नहीं कर सकते।
रक्षा क्षेत्र: मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, रडार, लड़ाकू विमानों के इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण और परमाणु पनडुब्बियों में इनका बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।

वैश्विक परिदृश्य और चीन का दबदबा
रेयर अर्थ मैग्नेट की आपूर्ति श्रृंखला पर वर्तमान में चीन का एकछत्र राज्य है। दुनिया के लगभग 85% से 90% रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन चीन में होता है। चीन ने न केवल खदानों पर कब्जा किया है, बल्कि प्रसंस्करण (Processing) की तकनीक में भी दशकों की बढ़त हासिल कर ली है। हाल के वर्षों में पश्चिमी देशों और चीन के बीच बढ़ते तनाव ने भारत सहित पूरी दुनिया को अपनी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को सुरक्षित करने के लिए मजबूर कर दिया है।

भारत की वर्तमान स्थिति: कहां खड़े हैं हम?
भारत के पास रेयर अर्थ खनिजों का दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा भंडार है। मुख्य रूप से भारत के तटीय क्षेत्रों की ‘मोनाजाइट रेत’ (Monazite Sand) में नियोडिमियम, लैंथेनम और सेरियम जैसे तत्व पाए जाते हैं।
भंडार बनाम उत्पादन: भंडार के मामले में समृद्ध होने के बावजूद, वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 1% से भी कम है।सार्वजनिक क्षेत्र का नियंत्रण: वर्तमान में, भारत में रेयर अर्थ खनिजों का खनन मुख्य रूप से सरकारी कंपनी IREL (India) Limited (पूर्व में इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड) द्वारा किया जाता है। कच्चे माल का निर्यात: विडंबना यह है कि भारत वर्षों से इन खनिजों को कच्चे रूप में या कम मूल्य-वर्धित रूप में निर्यात करता रहा है, जबकि अंतिम उत्पाद (मैग्नेट) के लिए हम आयात पर निर्भर हैं।

भारत की भविष्य की योजना और रणनीतिक कदम
भारत सरकार अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रेयर अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में अपनी रणनीति को तेजी से बदल रही है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन
    हाल ही में भारत सरकार ने ‘खनिज कानून’ में संशोधन किया है ताकि निजी कंपनियां भी रेयर अर्थ खनिजों के खनन और प्रसंस्करण में उतर सकें। इससे निवेश और नई तकनीक आने की संभावना बढ़ी है।
  2. विशाखापत्तनम में मैग्नेट संयंत्र
    भारत सरकार विशाखापत्तनम में एक स्वदेशी ‘नियोडिमियम-आयरन-बोरान’ (NdFeB) मैग्नेट प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने इस तकनीक को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  3. खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड’ (KABIL) का गठन
    भारत ने विदेशों (विशेषकर ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और चिली) में रणनीतिक खनिजों की खदानों को खरीदने या पट्टे पर लेने के लिए KABIL नामक एक संयुक्त उद्यम बनाया है। इसका उद्देश्य भविष्य की आपूर्ति को सुरक्षित करना है।
  4. उत्पादन आधारित प्रोत्साहन’ (PLI) योजना
    सरकार रेयर अर्थ मैग्नेट और उनसे बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक घटकों के निर्माण के लिए PLI योजना के तहत सब्सिडी देने पर विचार कर रही है, ताकि भारत वैश्विक ‘चिप और मैग्नेट हब’ बन सके।
  5. अनुसंधान और नवाचार (R&D)
    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs) और CSIR की प्रयोगशालाओं को मैग्नेट रिसाइकिलिंग तकनीक विकसित करने का काम सौंपा गया है। पुराने ई-कचरे से रेयर अर्थ तत्वों को निकालना एक स्थायी समाधान हो सकता है।

चुनौतियां और आगे की राह
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन की कम कीमतों से मुकाबला करना और पर्यावरण अनुकूल रिफाइनिंग तकनीक विकसित करना है। रेयर अर्थ खनिजों के प्रसंस्करण में रेडियोधर्मी उप-उत्पाद (Radioactive by-products) निकलते हैं, जिनका सुरक्षित निपटान एक बड़ा मुद्दा है।

अंततः हम कह सकते हैं कि रेयर अर्थ मैग्नेट केवल वैज्ञानिक उपकरण नहीं हैं, बल्कि ये 21वीं सदी की भू-राजनीति के निर्णायक कारक हैं। भारत के पास संसाधन भी हैं और प्रतिभा भी। यदि भारत अपनी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सफल रहता है, तो वह न केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा कर पाएगा, बल्कि दुनिया के लिए चीन का एक विश्वसनीय विकल्प भी बन सकेगा। यह स्पष्ट है कि आने वाला दशक ‘चुंबकीय शक्ति’ का होगा, और भारत इसमें एक वैश्विक खिलाड़ी बनने की राह पर अग्रसर है।

Samvad 24 Office
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