दिमाग की भूलभुलैया में छिपे रहस्यों से उठेगा पर्दा: IIT बॉम्बे ने बनाया ‘ब्रह्मास्त्र’, अब अल्जाइमर और पार्किंसंस की खैर नहीं!

संवाद 24 मुंबई। चिकित्सा विज्ञान और तकनीक के संगम ने आज एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो आने वाले समय में मानव मस्तिष्क से जुड़ी सबसे जटिल बीमारियों की दिशा बदल सकती है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अभूतपूर्व खोज की है, जो अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी जानलेवा न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के खिलाफ जंग में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है।

क्या है यह नई तकनीक और क्यों मची है हलचल
अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियाँ न केवल मरीज के शरीर को कमजोर करती हैं, बल्कि उसकी याददाश्त और सोचने की क्षमता को भी पूरी तरह खत्म कर देती हैं। अब तक इनका कोई सटीक इलाज ढूँढना वैज्ञानिकों के लिए एक टेढ़ी खीर बना हुआ था। लेकिन IIT बॉम्बे ने अब एक व्यापक ‘डेटाबेस’ तैयार किया है, जो इन बीमारियों के मूल कारणों को समझने में मदद करेगा। इस डेटाबेस को विकसित करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य उन प्रोटीनों की पहचान करना है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं।

भूलने की बीमारी पर ‘डिजिटल’ प्रहार
संवाद 24 को मिली जानकारी के अनुसार, IIT बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने इस डेटाबेस में हजारों ऐसे अणुओं (molecules) और प्रोटीनों का विवरण संकलित किया है, जो न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के दौरान मस्तिष्क में असामान्य व्यवहार करते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह डेटाबेस दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए एक ‘खुले खजाने’ की तरह काम करेगा, जिससे नई दवाओं के परीक्षण और विकास में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।

भारत बनेगा वैश्विक अनुसंधान का केंद्र
यह पहल केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी जीत है। अक्सर भारतीय मरीजों की जेनेटिक संरचना पश्चिमी देशों से भिन्न होती है, जिसके कारण विदेशी दवाएं कई बार उतनी प्रभावी नहीं होतीं। IIT बॉम्बे का यह प्रयास भारतीय संदर्भ में इन बीमारियों को समझने का एक बड़ा माध्यम बनेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस डेटाबेस की मदद से अब ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’ यानी हर मरीज की जरूरत के हिसाब से इलाज संभव हो सकेगा।

कैसे काम करेगा यह सिस्टम
इस डेटाबेस में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) और ‘मशीन लर्निंग’ का उपयोग किया गया है। यह तकनीक मस्तिष्क में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों का विश्लेषण करती है और यह अनुमान लगाती है कि बीमारी किस स्तर तक बढ़ चुकी है। इससे शुरुआती लक्षणों के पहचान में मदद मिलेगी, जिससे समय रहते मरीज का इलाज शुरू किया जा सके।

निष नई उम्मीद की किरण
IIT बॉम्बे द्वारा उठाया गया यह कदम भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की तत्परता को दर्शाता है। अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसे रोगों से जूझ रहे करोड़ों परिवारों के लिए यह खबर एक नई उम्मीद लेकर आई है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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