कटनी में ज्ञान और संस्कृति का संगम: पांच दिवसीय पुस्तक मेले ने जगाई साहित्यिक चेतना
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संवाद 24 कटनी। शहर के साधूराम उच्चत्तर माध्यमिक स्कूल परिसर में बुधवार शाम पुस्तक प्रेमियों और साहित्य साधकों के लिए ऐतिहासिक क्षण बन गई। परिसर में आयोजित पांच दिवसीय पुस्तक मेला एवं साहित्य महोत्सव का शुभारंभ गरिमामय माहौल में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। समारोह का आरंभ अतिथियों द्वारा पारंपरिक विधि से दीप जलाकर किया गया, जिसके बाद स्कूल के छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर पूरे आयोजन स्थल को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद, छात्र, अभिभावक और जिलेवासी उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम में उत्साह और सांस्कृतिक रंगत और अधिक गहरी हो गई।
बुद्धि, विचार और दृष्टि का संगम: मुख्य वक्ता की उपस्थिति ने बढ़ाया कार्यक्रम का गौरव
शुभारंभ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर जी मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने साहित्य और पुस्तकों को समाज निर्माण का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि पुस्तक संस्कृति, वैचारिक समृद्धि और राष्ट्र चिंतन का आधार हैं। उनके विचारों ने वहां उपस्थित युवाओं और विद्यार्थियों में साहित्य और पठन-पाठन के प्रति नई प्रेरणा जगाई। इस अवसर पर अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के कुलगुरू डॉ. राजेन्द्र कुमार कुररिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुस्तक मेले जैसे आयोजन समाज में अध्ययनशीलता को मजबूत करते हैं और विभिन्न विषयों पर संवाद की संभावनाएं बढ़ाते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता और प्रशासनिक उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी आशीष तिवारी ने की। उन्होंने जिले में शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रशासन की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल छात्रों में जिज्ञासा को बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में शोध, संवाद और रचनात्मक सोच के द्वार खोलते हैं। इस दौरान विशिष्ट अतिथि के तौर पर विपिन तिवारी तथा जिले के पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा भी मौजूद रहे। उनकी सहभागिता ने आयोजन की गरिमा और महत्ता को और अधिक ऊँचाई प्रदान की। प्रशासन और सामाजिक संगठनों की संयुक्त उपस्थिति इस बात का प्रतीक रही कि साहित्य और शिक्षा के विकास को लेकर स्थानीय स्तर पर सकारात्मक वातावरण तैयार हो रहा है।
‘संघ शतक’ पुस्तक का विमोचन बना विशेष आकर्षण
कार्यक्रम का सबसे उल्लेखनीय क्षण वह रहा जब स्वामी विवेकानंद जनसेवा संस्थान के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘संघ शतक’ का विमोचन किया गया। यह पुस्तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष, उसके विचार-स्रोत, कार्य विस्तार, जीवंतता और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण में निभाई गई भूमिका पर केंद्रित मानी जा रही है। पुस्तक का प्रकाशन ग्रंथ अकादमी नई दिल्ली द्वारा किया गया है, जो इसके शोधात्मक और साहित्यिक महत्व को प्रमाणित करता है। विमोचन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ी के लिए इतिहास, वैचारिक अध्ययन और संगठन के मूल दर्शन को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत सिद्ध होगी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
शुभारंभ दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत नृत्य, समूहगान और साहित्यिक पाठ ने माहौल को उत्सवपूर्ण बना दिया। इन प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, विचारधारा, राष्ट्रभावना और कला अभिव्यक्ति की झलक स्पष्ट दिखाई दी, जो इस आयोजन के उद्देश्य पुस्तक से संस्कृति तक, संस्कृति से समाज तक को सार्थक ही नहीं, जीवंत बनाती नज़र आई।
बड़ा जनसमूह और बढ़ती सहभागिता
पुस्तक मेले के प्रथम दिन ही बड़ी संख्या में जिलेवासी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, अभिभावक और विद्यार्थी पहुंचे। मेले में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और विविध भारतीय भाषाओं की पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध है। इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, बाल साहित्य, आध्यात्मिकता, प्रतियोगी परीक्षाएँ, जीवन प्रबंधन, कथात्मक साहित्य और शोध आधारित पुस्तकों का व्यापक संकलन पाठकों को आकर्षित कर रहा है। आयोजकों के अनुसार आगामी दिनों में लेखकीय विमर्श, कवि सम्मेलन, पुस्तक परिचर्चा, प्रेरक सत्र और छात्रों के लिए विशेष कार्यशालाएँ भी आयोजित की जाएँगी, जिससे संवाद और भागीदारी और अधिक विस्तृत होगी।
समारोह का महत्व और सामाजिक प्रभाव
यह आयोजन केवल एक पुस्तक मेला नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रयास है। समाज में पठन-पाठन की संस्कृति कमजोर होने और डिजिटल युग में ध्यान विचलन की प्रवृत्ति के बीच यह कार्यक्रम पुस्तकों की वापसी, ज्ञान की निरंतरता और साहित्यिक मूल्यों के पुनर्स्थापन का अवसर लेकर आया है। साहित्य महोत्सव से युवा पीढ़ी को मूल्यों, विचारों और ज्ञान की ओर आकर्षित करने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रयास संस्कृति संरक्षण, शिक्षा विस्तार और जिम्मेदार समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
साहित्यिक चेतना के नवोदय की ओर कदम
कटनी में आयोजित यह पुस्तक मेला और साहित्य महोत्सव शहर को शिक्षा, साहित्य और सांस्कृतिक वैभव के नए आयामों से जोड़ रहा है। विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि समाज में आज भी पुस्तकें सोच को दिशा देने और चरित्र निर्माण का आधार बनने की क्षमता रखती हैं। आने वाले पाँच दिनों में यह आयोजन न सिर्फ पुस्तकों का मेला रहेगा, बल्कि विचारों, संवाद, चिंतन और रचनात्मकता का महोत्सव बनकर जिले के बौद्धिक और सांस्कृतिक वातावरण को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।






