विराट हिन्दू सम्मेलन में संघ की शताब्दी यात्रा और पंच परिवर्तन का संदेश, रामनगरिया में उमड़ा विशाल जनसमूह
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संवाद 24 संवाददाता। बढ़पुर खण्ड के चांदपुर मंडल द्वारा आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन रामनगरिया स्थित सांस्कृतिक पांडाल में उत्साह और अनुशासनपूर्ण वातावरण के बीच संपन्न हुआ। सम्मेलन में बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता रही, जिससे यह आयोजन सामाजिक एकता और वैचारिक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम का उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित रहने, सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति सजग बनने तथा राष्ट्रीय जीवन में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान एवं अनुशासित व्यवस्था के साथ की गई। आयोजन स्थल पर राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण का भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। विभिन्न वक्ताओं ने अपने-अपने संबोधनों में संगठनात्मक विचारधारा, सामाजिक सरोकारों और वर्तमान परिस्थितियों में समाज की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य श्रीमान सुरेश जी रहे। उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की यात्रा का विस्तारपूर्वक उल्लेख करते हुए कहा कि संघ की स्थापना समाज को संगठित करने, चरित्र निर्माण तथा राष्ट्रहित में जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से हुई थी। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक काल में सीमित संसाधनों के बावजूद संघ ने स्वयंसेवकों के माध्यम से राष्ट्रव्यापी कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाया।

सुरेश जी ने कहा कि संघ की यात्रा केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा कार्यों, आपदा राहत, शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आज संघ के विचारों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचाने का दायित्व स्वयंसेवकों के साथ-साथ आम नागरिकों पर भी है।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने समस्त हिन्दू समाज को एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक विघटन और वैचारिक भ्रम की स्थिति में संगठित समाज ही राष्ट्र को सशक्त बना सकता है। उनके अनुसार, हिन्दू समाज की एकता केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी आवश्यक है।
सम्मेलन में विभाग कार्यवाह विजय अवस्थी जी ने पंच परिवर्तन विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पंच परिवर्तन का आशय समाज में व्यवहारिक और वैचारिक परिवर्तन लाकर जीवन पद्धति को सुदृढ़ बनाना है। इसमें सामाजिक समरसता, स्वदेशी भावना, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और पारिवारिक मूल्यों जैसे विषयों को प्रमुखता दी जाती है।

विजय अवस्थी जी ने कहा कि आज के समय में उपभोक्तावादी सोच के कारण समाज अपने मूल संस्कारों से दूर होता जा रहा है। पंच परिवर्तन का उद्देश्य केवल विचार देना नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इन मूल्यों को अपनाकर समाज के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंच परिवर्तन किसी राजनीतिक या वैचारिक विरोध का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर, अनुशासित और संस्कारयुक्त बनाने की दिशा में एक सामाजिक अभियान है।
कार्यक्रम में मातृ शक्ति के रूप में उपस्थित बहन सिमरन सिंधी जी ने हिन्दू परिवारों को संस्कारशाली बनाने में नारी शक्ति की भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है और उसके निर्माण में नारी की भूमिका केंद्रीय होती है। यदि परिवार संस्कारयुक्त होगा तो समाज स्वतः सशक्त बनेगा।
उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि नारी केवल घर तक सीमित भूमिका नहीं निभाती, बल्कि समाज की दिशा तय करने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। बच्चों के संस्कार, परंपराओं का संरक्षण और नैतिक मूल्यों का संचार मुख्य रूप से परिवार के माध्यम से होता है, और इसमें नारी शक्ति की भूमिका निर्णायक होती है।
सिमरन सिंधी जी ने कहा कि आधुनिक समय में शिक्षा और तकनीक के विस्तार के साथ नारी की भूमिका और भी व्यापक हो गई है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं से अपील की कि वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपने परिवार और समाज दोनों को सशक्त बनाएं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अवधेश कटियार जी द्वारा की गई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में संवाद और विचार-विमर्श की संस्कृति को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने के लिए ऐसे मंचों की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का संचालन जिला शारीरिक प्रमुख रजत जी द्वारा किया गया। उन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया और वक्ताओं के विचारों को श्रोताओं तक प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया। उनके संचालन में अनुशासन और स्पष्टता देखने को मिली।

कार्यक्रम मे विभाग प्रचारक राहुल, जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी, अपर जिला अधिकारी (न्यायिक )/मेला सचिव दिनेश कुमार, उप जिलाधिकारी सदर रजनीकांत, जिला सम्पर्क प्रमुख कृष्णकांत महाजन, खण्ड कार्यवाह भानु, ज्ञानेंद्र जी, शिवानंद, उदय, राहुल, अंकित, देवेंद्र, रामनारायण, सुरेंद्र पाण्डेय सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिकों की सहभागिता ने आयोजन को सफल बनाया। उपस्थित लोगों ने वक्ताओं के विचारों को गंभीरता से सुना और सामाजिक एकता के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

विराट हिन्दू सम्मेलन का मुख्य संदेश सामाजिक एकता, पारिवारिक संस्कार और राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध रहा। वक्ताओं ने यह स्पष्ट किया कि समाज की मजबूती केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण से आती है। सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हिन्दू समाज को अपने भीतर व्याप्त विभिन्नताओं के बावजूद एक सूत्र में बंधकर रहना चाहिए। सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों की रक्षा ही राष्ट्र को सशक्त बनाने का आधार है।
रामनगरिया के सांस्कृतिक पांडाल में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन ने सामाजिक चेतना और संगठनात्मक विचारधारा को सुदृढ़ करने का कार्य किया। संघ की शताब्दी यात्रा, पंच परिवर्तन का विचार और नारी शक्ति की भूमिका जैसे विषयों पर हुए विचार-विमर्श ने श्रोताओं को चिंतन के लिए प्रेरित किया। यह आयोजन न केवल एक सम्मेलन था, बल्कि समाज को आत्ममंथन और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देने वाला मंच भी सिद्ध हुआ। वक्ताओं के विचारों और उपस्थित जनसमूह की सहभागिता ने यह संकेत दिया कि सामाजिक एकता और संस्कारों पर आधारित जीवन पद्धति आज भी प्रासंगिक है और भविष्य के लिए आवश्यक भी।
बढ़पुर खण्ड के चांदपुर मंडल द्वारा आयोजित यह विराट हिन्दू सम्मेलन सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।






