RSS का सामाजिक महाअभियान: शताब्दी वर्ष में देशभर में होंगे एक लाख से अधिक हिंदू सम्मेलन
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संवाद 24 नई दिल्ली/मथुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष को केवल एक संगठनात्मक उत्सव नहीं, बल्कि ‘समाज उत्सव’ के रूप में मनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में संघ ने देशभर में एक लाख से अधिक हिंदू सम्मेलन आयोजित करने की व्यापक योजना बनाई है, जिसकी औपचारिक शुरुआत 15 जनवरी से होगी।
संघ से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार, इन सम्मेलनों का उद्देश्य संपूर्ण हिंदू समाज को एक साझा मंच पर लाकर सामाजिक एकता, समरसता और संवाद को मजबूत करना है। यह श्रृंखला पिछले वर्ष विजयदशमी के अवसर पर संघ नेतृत्व के आह्वान के बाद प्रारंभ हुई थी, जिसे अब राष्ट्रव्यापी स्वरूप दिया जा रहा है।
एकता और सामाजिक परिवर्तन पर फोकस
संघ के अनुसार, इन सम्मेलनों में चर्चा का केंद्र सामाजिक सौहार्द, आपसी सहयोग और संगठन द्वारा सुझाए गए पांच परिवर्तनकारी सामाजिक बिंदु होंगे। संघ का मानना है कि ये पहलें समाज में मौजूद वर्ग और जाति आधारित दूरी को कम कर एक समन्वित हिंदू पहचान को मजबूती देंगी।
ब्रज प्रांत के प्रचार प्रमुख कीर्ति कुमार के मुताबिक, “इन सम्मेलनों का लक्ष्य लोगों को जोड़ना, संवाद स्थापित करना और समाज के भीतर सकारात्मक परिवर्तन की जमीन तैयार करना है।”
ब्रज प्रांत में 2,000 सम्मेलन
उत्तर प्रदेश के ब्रज प्रांत में इस अभियान को विशेष विस्तार दिया गया है। यहां 15 जनवरी से 15 फरवरी के बीच 12 जिलों में करीब 2,000 स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इनमें प्रांत, क्षेत्र और जिला स्तर के पदाधिकारी भाग लेंगे। अनुमान है कि लगभग 3,000 बस्तियां और मंडल इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे। स्थानीय आयोजन समितियां 11 से 21 जनवरी के बीच तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।
बुद्धिजीवी, संत और समाज के विभिन्न वर्ग होंगे शामिल
सम्मेलनों में केवल संघ कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि शिक्षक, चिकित्सक, इंजीनियर, बुद्धिजीवी, महिला प्रतिनिधि, संत और समाज के प्रतिष्ठित नागरिक भी सहभागिता करेंगे। प्रत्येक सम्मेलन में स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम का समापन सामुदायिक भोज के माध्यम से किया जाएगा। मथुरा जिले में ही 86 मंडलों और 76 शहरी बस्तियों में लगभग 150 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाने की योजना है।
शताब्दी वर्ष को जनआंदोलन में बदलने की तैयारी
संघ सूत्रों का कहना है कि यह आयोजन केवल वर्षगांठ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे समाज के भीतर दीर्घकालिक संवाद और सहभागिता की प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जाएगा।RSS का यह कदम आने वाले महीनों में सामाजिक और वैचारिक स्तर पर व्यापक असर डाल सकता है, जिस पर देशभर की नजरें टिकी






