हरिद्वार में खेल, स्वास्थ्य और संस्कार का संगम: ‘ओजस’ खेल महोत्सव का भव्य समापन

संवाद 24 हरिद्वार। धर्मनगरी स्थित पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय में आयोजित चार दिवसीय वार्षिक खेल महोत्सव ‘ओजस’ का सोमवार को भव्य एवं अनुशासित वातावरण में समापन हो गया। इस आयोजन ने न केवल विद्यार्थियों की खेल प्रतिभा को मंच दिया, बल्कि आयुर्वेदिक शिक्षा, योग और आधुनिक खेल संस्कृति के संतुलन का एक प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत किया। चार दिनों तक चले इस महोत्सव में विभिन्न इनडोर और आउटडोर खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने अनुशासन, समर्पण और खेल भावना का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

खेल महोत्सव ‘ओजस’ का उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करना रहा। आयोजकों के अनुसार, आयुर्वेदिक शिक्षा केवल शास्त्रीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि शारीरिक सुदृढ़ता, मानसिक संतुलन और सामूहिक सहयोग भी इसका अभिन्न हिस्सा हैं। इसी सोच के साथ इस वार्षिक आयोजन को नियमित रूप से आयोजित किया जाता है, ताकि छात्र-छात्राएं पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी अपनी क्षमताओं को पहचान सकें और उन्हें निखार सकें।

चार दिवसीय आयोजन के दौरान एथलेटिक्स, कबड्डी, वॉलीबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, शतरंज, कैरम सहित कई अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। प्रत्येक खेल में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का परिचय दिया। खेल मैदानों पर दर्शकों की उपस्थिति और खिलाड़ियों का जोश यह दर्शा रहा था कि ‘ओजस’ केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि महाविद्यालय के सांस्कृतिक और शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण उत्सव बन चुका है

समापन समारोह के अवसर पर योगपीठ के महामंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की और कहा कि खेल जीवन में अनुशासन, नेतृत्व और टीम भावना का विकास करते हैं। आचार्य बालकृष्ण ने अपने संबोधन में इस बात पर बल दिया कि स्वस्थ शरीर और सकारात्मक मानसिकता के बिना किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करना कठिन है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे खेलों को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।

आचार्य बालकृष्ण ने यह भी कहा कि आयुर्वेद की मूल भावना ही ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्’ है, और खेल इसी भावना को व्यवहार में उतारने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने पतंजलि संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भविष्य का चिकित्सक, शोधकर्ता और समाज-निर्माता बताते हुए कहा कि यदि वे स्वयं शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे, तभी समाज को सही दिशा दे सकेंगे।

समारोह के दौरान महाविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों ने भी आयोजन की सफलता पर संतोष व्यक्त किया। प्राचार्य एवं खेल समन्वयकों ने बताया कि इस वर्ष खेल महोत्सव को और अधिक व्यवस्थित तथा व्यापक बनाने का प्रयास किया गया। प्रतियोगिताओं के संचालन में निष्पक्षता, समयबद्धता और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया। स्वयंसेवकों और आयोजन समिति के सदस्यों ने पूरे आयोजन के दौरान अनुकरणीय समर्पण का परिचय दिया।

खेल महोत्सव ‘ओजस’ का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि इसमें केवल जीत-हार को ही नहीं, बल्कि खेल भावना को भी विशेष महत्व दिया गया। कई प्रतियोगिताओं में ऐसे उदाहरण देखने को मिले, जहां खिलाड़ियों ने नियमों का पालन करते हुए विरोधी टीम के प्रति सम्मान दिखाया। आयोजकों द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी’, ‘उत्कृष्ट अनुशासन’ और ‘फेयर प्ले’ जैसे विशेष पुरस्कारों की व्यवस्था भी की गई, ताकि विद्यार्थियों को सकारात्मक मूल्यों के लिए प्रेरित किया जा सके।

चार दिनों तक चले इस आयोजन ने महाविद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल बनाए रखा। खेल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ प्रेरक संदेशों, योगाभ्यास और सामूहिक गतिविधियों ने विद्यार्थियों को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। इससे न केवल आपसी सौहार्द बढ़ा, बल्कि छात्रों में नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हुई।

समापन समारोह में विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी, पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। पुरस्कार वितरण के दौरान विद्यार्थियों के चेहरे पर आत्मविश्वास और गर्व साफ झलक रहा था। कई प्रतिभागियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन पढ़ाई के तनाव को कम करने के साथ-साथ उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा देते हैं।

महाविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में खेल महोत्सव ‘ओजस’ को और अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित करने की योजना की भी जानकारी दी। इसमें अन्य शैक्षणिक संस्थानों के साथ मैत्रीपूर्ण प्रतियोगिताएं, पारंपरिक भारतीय खेलों को शामिल करने और खेल विज्ञान से जुड़े व्याख्यानों को जोड़ने जैसे प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को खेलों के वैज्ञानिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं की समझ विकसित करने में सहायता मिलेगी।

कुल मिलाकर, पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय में आयोजित वार्षिक खेल महोत्सव ‘ओजस’ ने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल एक-दूसरे के पूरक हैं। यह आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया, जिसने अनुशासन, समर्पण और सामूहिकता के मूल्यों को मजबूत किया। धर्मनगरी हरिद्वार से उठी यह पहल निश्चित रूप से अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।

Samvad 24 Office
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