दीपावली महालक्ष्मी पूजन एवं अष्टलक्ष्मी साधना विधि
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संवाद 24 (आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री)।
(शास्त्रीय परंपरा एवं कर्मकाण्ड सिद्ध रूप में)
कालविभाग – अमावस्या तिथि, सोमवासर, प्रदोषकाल में (सायं 6:50 से 8:46 तक)। वृषभ लग्न, शुभ चौघड़िया, प्रदोष व प्रथम लय के योग में पूजन परम फलदायक होता है।
आसन एवं पूजन स्थल व्यवस्था
पूजन स्थल को पवित्र जल, गंगाजल से शुद्ध कर, पूर्वाभिमुख चौकी पर लाल अथवा पीले वस्त्र का आसन बिछाएँ। चौकी पर श्रीगणेश एवं महालक्ष्मी का प्रतिष्ठित चित्र या विग्रह स्थापित करें। पीछे पृष्ठभूमि में झालरों की अलंकारिक सज्जा, दीपों की पंक्तियाँ, पुष्पमालाएँ और शुभ स्वस्तिक अंकित करें।
पूर्वविधि (आचमन, संकल्प, न्यास)
आचमन मंत्र:
“ॐ केशवाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ गोविन्दाय नमः।”
संकल्प मंत्र:
“मम कुलकुटुम्बाभ्युदयार्थं दरिद्र्यनिवारणार्थं च श्रीमहालक्ष्मी पूजनं करिष्ये।”
गणेश पूजन
“ॐ गं गणपतये नमः” से पूजन आरंभ कर
चंदन, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, मोदक एवं दीप अर्पित करें।
महालक्ष्मी पूजन विधि
कच्चे दूध, गंगाजल, केसर, पुष्पजल से महालक्ष्मी का स्नान कराएँ। फिर हल्दी, कुंकुम, अक्षत, चंदन, पुष्प, नीलकमल, रक्तकमल, श्वेतकमल, धूप, दीप, नैवेद्य एवं दक्षिणा अर्पित करें।
स्तोत्र पाठ:
श्रीसूक्त,
लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनाम,
कनकधारा स्तोत्र,
अथवा “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” का 108 जप।
अष्टलक्ष्मी पूजन – भाग्योदयकारक प्रयोग
यह प्रयोग दीपावली रात्रि का मंगलकारी एवं परम फलदायक विधान है। शुद्ध पात्र में अष्टलक्ष्मी यंत्र प्रतिष्ठित करें, कच्चे दूध व जल से अभिषेक कर, चौकी पर स्थापित करें। फिर क्रमशः आठों दिशाओं में मातृशक्ति का ध्यान करें-
1️⃣ ॐ आदि लक्ष्म्यै नमः
2️⃣ ॐ धन लक्ष्म्यै नमः
3️⃣ ॐ गज लक्ष्म्यै नमः
4️⃣ ॐ संतति लक्ष्म्यै नमः
5️⃣ ॐ वीर लक्ष्म्यै नमः
6️⃣ ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः
7️⃣ ॐ धैर्य लक्ष्म्यै नमः
8️⃣ ॐ अष्ट लक्ष्म्यै नमः
प्रत्येक नाम मंत्र का 108 या 101 बार जप करें।
अष्टलक्ष्मी के समक्ष दीप आरती करें एवं पुष्पांजलि अर्पित करें।
अंग पूजन (देवी-अवयव अर्चन)
शिरसि जलं अर्पयामि
नेत्रयोः पुष्पं अर्पयामि
कर्णयोः अक्षतं अर्पयामि
हस्तयोः चंदनं अर्पयामि
पादयोः जलं अर्पयामि
मंत्र उच्चारण –
“मम गृहेषु सर्वदा श्रीः स्थिरा भवतु नित्यदा।”
विशेष दीपावली साधना (रात्रिकालीन विधान)
???? श्रीसूक्त-पाठ या लक्ष्मी सहस्रनाम पाठ।
???? दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर महालक्ष्मी अभिषेक।
???? अखंड दीप प्रज्वलन, शंखध्वनि, घंटारव एवं रात्रि-जागरण।
???? उत्तराभिमुख होकर “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” का जप।
पूजन फल एवं सिद्धि
इस प्रकार विधिपूर्वक पूजन करने से
गृह में स्थायी लक्ष्मी का निवास होता है,
दरिद्रता, बाधा एवं अशुभता का नाश होता है,
भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
शुभ वचन:
“दीपज्योति परमं ब्रह्म, लक्ष्मी रूपेण संस्थितम्।
तस्मात् पूज्यं प्रयत्नेन दीपं सर्वार्थसिद्धये॥”






