चैत्र नवरात्रि 2026 : तिथि, घटस्थापना मुहूर्त, देवी आगमन प्रस्थान एवं शास्त्रीय महत्व
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विशेष संवाददाता | संवाद 24
मुख्य विश्लेषक: आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री (वैदिक ज्योतिष, धर्मनिर्णय एवं कर्मकांड विशेषज्ञ)
वैदिक पंचांग के अनुसार संवत् 2083 के चैत्र शुक्ल पक्ष से वर्ष की पहली और अत्यंत पवित्र चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होता है। यह नौ दिनों का महापर्व आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना, साधना और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर माना जाता है।
सन 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च को रामनवमी के साथ समाप्त होगी। इन नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिसे नवदुर्गा उपासना कहा जाता है।
चैत्र नवरात्रि 2026 तिथि विवरण
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ – 19 मार्च 2026, सुबह 06:52
प्रतिपदा तिथि समाप्त – 20 मार्च 2026, सुबह 04:52
इस प्रकार 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होगा और 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) को रामनवमी के साथ इसका समापन होगा।
घटस्थापना (कलश स्थापना) मुहूर्त
नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसी के साथ माता की विधिवत पूजा प्रारंभ होती है।
शुभ मुहूर्त
सुबह 06:52 से 07:50 तक
अवधि – लगभग 57 मिनट
अभिजित मुहूर्त
12:11 से 12:59 तक
अवधि – लगभग 48 मिनट
यह मुहूर्त द्विस्वभाव मीन लग्न में पड़ रहा है, जो पूजा आरंभ करने के लिए अनुकूल माना गया है।
माता का आगमन – डोली (पालकी)
धार्मिक ग्रंथों और देवी पुराण के अनुसार सप्ताह के दिन के आधार पर माता की सवारी का निर्धारण होता है। 2026 में नवरात्रि गुरुवार से प्रारंभ हो रही है, इसलिए माता का आगमन डोली (पालकी) पर माना गया है।
डोली आगमन का संकेत
परंपरागत मान्यता के अनुसार डोली पर आगमन को बहुत शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि यह संकेत देता है —
सामाजिक या राजनीतिक अस्थिरता
आर्थिक उतार-चढ़ाव
प्राकृतिक आपदाओं की आशंका
संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना
इसी कारण शास्त्रों में ऐसे समय विशेष साधना, जप, यज्ञ और देवी आराधना करने का निर्देश दिया गया है।
माता का प्रस्थान – हाथी (गज)
चैत्र नवरात्रि का समापन 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) को होगा।
शुक्रवार के कारण माता का प्रस्थान हाथी पर माना गया है।
हाथी सवारी का शुभ फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हाथी का अर्थ है —
वर्षा की प्रचुरता
कृषि में उन्नति
आर्थिक स्थिरता
समृद्धि और शांति
इसलिए भले ही माता का आगमन डोली पर हो, लेकिन हाथी पर विदाई अत्यंत मंगलकारी संकेत मानी जाती है।
नवरात्रि में किस दिन किस देवी की पूजा
तिथि देवी स्वरूप दिन
19 मार्च मां शैलपुत्री प्रतिपदा
20 मार्च मां ब्रह्मचारिणी द्वितीया
21 मार्च मां चंद्रघंटा तृतीया
22 मार्च मां कुष्मांडा चतुर्थी
23 मार्च मां स्कंदमाता पंचमी
24 मार्च मां कात्यायनी षष्ठी
25 मार्च मां कालरात्रि सप्तमी
26 मार्च मां महागौरी अष्टमी
27 मार्च मां सिद्धिदात्री नवमी / रामनवमी
नवरात्रि में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
नवरात्रि साधना का समय है, इसलिए कुछ नियमों का पालन आवश्यक है —
❌ मांस और मदिरा का सेवन न करें
❌ प्याज-लहसुन से परहेज रखें
❌ तामसिक भोजन से बचें
❌ किसी को अपशब्द या कष्ट न दें
❌ दिन में अधिक सोने से बचें
✔ सात्त्विक भोजन करें
✔ जप-पाठ और देवी स्तुति करें
✔ दान-पुण्य और सेवा करें
नवरात्रि 2026 का संभावित प्रभाव
ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार —
प्रारंभिक समय में खर्चों में वृद्धि हो सकती है
स्वास्थ्य और रोगों के प्रति सावधानी आवश्यक होगी
खान-पान और योग पर ध्यान देना लाभदायक रहेगा
लेकिन माता का हाथी पर प्रस्थान यह संकेत देता है कि —
✨ वर्ष भर आर्थिक स्थिरता बढ़ेगी
✨ निवेश और व्यापार में लाभ मिलेगा
✨ कृषि और वर्षा अनुकूल होगी
✨ समाज में शांति और समृद्धि बढ़ेगी
चैत्र नवरात्रि 2026 भक्ति, साधना और आत्मशक्ति जागरण का श्रेष्ठ अवसर है। 19 मार्च को घटस्थापना करके मां दुर्गा का स्वागत करें और पूरे नौ दिनों तक श्रद्धा-भक्ति से पूजा कर सुख, समृद्धि और मंगलमय भविष्य की कामना करें।







