मौनी अमावस्या 2026 : मौन से मन, स्नान से तन और दान से आत्मा की शुद्धि
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संवाद 24 आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री।
मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026, रविवार
माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। यह केवल एक तिथि नहीं,बल्कि आत्मसंयम, शुद्ध आचरण और अंतर्मुखी साधना का दुर्लभ पर्व है।सनातन धर्म में माघ मास को माधव मास कहा गया है और इसकी अमावस्या को धर्म, दान और ध्यान तीनों का संगम मानी जाती है।
मौनी अमावस्या का मूल संदेश है – कम बोलो, अधिक सोचो और आत्मा को सुनो।
मौनी अमावस्या का शास्त्रीय महत्व
धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन-
मौन व्रत से वाणी के दोष शांत होते हैं
ब्रह्ममुहूर्त में स्नान से तन–मन की अशुद्धियाँ नष्ट होती हैं। दान और तर्पण से पितृ ऋण शमन होता है
शास्त्रों में कहा गया है—
“माघे स्नात्वा तु यो मौनी, स सर्वपापैः प्रमुच्यते।”
अर्थात माघ मास की अमावस्या को मौन रहकर स्नान करने वाला
समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।
स्नान का आध्यात्मिक रहस्य
मौनी अमावस्या का स्नान केवल शरीर की शुद्धि नहीं,
बल्कि अहंकार, क्रोध और असंतुलित भावनाओं का विसर्जन है।
गंगा, यमुना, सरस्वती या किसी भी पवित्र जल में स्नान करे संभव न हो तो घर पर जल में तिल मिलाकर स्नान कर सकते हैं स्नान के समय मौन और ध्यान का पालन,यह स्नान व्यक्ति को आत्मचिंतन और संयम की ओर ले जाता है।
मौन व्रत : आज के शोर भरे युग में मौन का महत्व
आज जब जीवन निरंतर बोलने,लिखने और प्रतिक्रिया देने में उलझा है,मौनी अमावस्या हमें सिखाती है हर उत्तर शब्दों में नहीं होता,कुछ उत्तर मौन में भी मिलते हैं।
मौन व्रत से मानसिक अशांति कम होती है।विचारों की स्पष्टता बढ़ती है।आत्मसंयम की शक्ति विकसित होती है
पितृ दोष शांति हेतु किसी सुपात्र ब्राह्मण को मौनी अमावस्या पर विशेष रूप सेतिल का दान,अन्न, वस्त्र और जल का दान पितरों के लिए करना चाहिए।
अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। शास्त्र मानते हैं कि तिल अग्नि और सूर्य तत्व का प्रतीक है,जो पितृ दोष और सूक्ष्म बाधाओं को शांत करता है।
सूर्य अर्घ्य का विशेष महत्व
ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय पर तांबे के पात्र से सूर्य को इस मंत्र से अर्घ्य दें – ॐ घृणि सूर्याय नमः
यह आत्मबल बढ़ाता है
पितृ ऋण शमन में सहायक तो होता ही है,साथ जीवन में स्पष्टता और ऊर्जा देता है
क्या करें – क्या न करें
क्या करें
मौन व्रत का यथाशक्ति पालन
स्नान, दान और सूर्य अर्घ्य
सात्विक भोजन
ध्यान और जप
क्या न करें
वाद–विवाद और कटु वाणी
अपवित्र आचरण
आलस्य और असंयम
केवल औपचारिकता निभाना
मौनी अमावस्या का वास्तविक अर्थ मौनी अमावस्या हमें याद दिलाती है कि धर्म केवल कर्मकांड नहीं,आत्मसंयम और आत्मशुद्धि की प्रक्रिया है।
18 जनवरी 2026 की यह अमावस्या हर साधक, गृहस्थ और जिज्ञासु के लिए अपने भीतर झाँकने का अवसर है।







