शुक्र उदय का इंतज़ार क्यों? जानिए वह समय जब शुभ कार्य करना माना जाता है अशुभ
Share your love

संवाद 24 आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का अस्त (अदृश्य होना) और उदय (पुनः दृश्यमान होना) केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि धार्मिक–सांस्कृतिक निर्णयों का आधार माना गया है। विवाह, गृहप्रवेश, उपनयन जैसे सभी शुभ संस्कार ग्रह की शुभ अवस्था में ही सम्पन्न करने का संकेत शास्त्र सदैव देते आए हैं।
इसी क्रम में वर्ष 2025–26 में घटित होने वाला शुक्र ग्रह का अस्त–उदय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि शुक्र ही सौंदर्य, दांपत्य, सुख, समृद्धि और मांगलिक कर्म का प्रमुख ग्रह है।
शुक्र ग्रह अस्त – 11 दिसंबर 2025
खगोलीय गणना के अनुसार 11 दिसंबर को शुक्र पूर्व दिशा में अस्त होगा। अस्त अवधि को “ग्रह-दुर्बलता” कहा गया है, जिसमें ग्रह के शुभ प्रभाव क्षीण हो जाते हैं।
इसी कारण इस अवधि में –
विवाह
सगाई
गृहप्रवेश
मुंडन–उपनयन
शुभ आरंभ
शास्त्रों में वर्जित माने गए हैं।
शुक्र ग्रह उदय – 1 फरवरी 2026
लगभग 52 दिन बाद, 1 फरवरी को शुक्र पश्चिम दिशा में उदित होगा। उदय के पश्चात शुक्र पुनः अपनी शुभ फलदायक स्थिति में लौट आता है और सभी मांगलिक कार्य सामान्य नियम से किए जा सकते हैं।
सूतक अवधि : शास्त्रीय नियम
शुक्र अस्त होने से 3 दिन पूर्व सूतक आरंभ होता है
शुक्र उदय होने के 3 दिन बाद सूतक समाप्त होता है
इस आधार पर –
सूतक प्रारंभ : 8 दिसंबर 2025
सूतक समाप्ति : 4 फरवरी 2026
यह पूरा समय धार्मिक दृष्टि से प्रतिबंधित माना जाता है।
सूतक में वर्जित कार्य
शास्त्रों के अनुसार नीचे लिखित सभी कार्य वर्जित हैं
विवाह व दांपत्य कार्यक्रम
सगाई, रिश्ता-निर्णय
गृहप्रवेश, भूमि-पूजन
मुंडन, उपनयन
नए निर्माण की शुरुआत
मांगलिक पूजा, मंडप-आरंभ
सूतक में अनुमेय कार्य
इस समय शुद्धता, जप, ध्यान और दान कार्य शुभ माने गए हैं—
मंत्र जप(अत्यावश्यके)
देवी-देवता की आराधना
व्रत, पाठ
हवन, दीपदान
अन्नदान, गोसेवा
सत्संग और साधना
“सूतक के इस समय को धार्मिक संयम और साधना के विशेष दिनों की तरह उपयोग करें। शुक्र के पुनः उदय के बाद ही विवाह, गृहप्रवेश एवं शुभ संस्कारों का आरंभ करें—तभी कर्म पूर्ण फल देते हैं।”






