भक्ति की धारा में डूबा कानपुर: पनकी हनुमान दरबार की भव्य पदयात्रा
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संवाद 24 संवाददाता। नव वर्ष की पूर्व संध्या पर कानपुर शहर भक्ति और उत्साह की अनुपम लहर में डूब गया। श्री बजरंग भक्त परिवार मंडल के तत्वावधान में निकाली गई पारिवारिक संगीतमय पदयात्रा ने पनकी हनुमान जी के दरबार तक पहुंचकर शहरवासियों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। भजन-कीर्तनों की मधुर धुन, जयकारों की गूंज और पुष्पवर्षा की सुगंध से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
यह पदयात्रा महामंडलेश्वर महंत जितेंद्र दास एवं महामंडलेश्वर कृष्ण दास महाराज के पावन सान्निध्य में सुबह साढ़े सात बजे बादशाही नाका चौराहे स्थित हनुमान मंदिर से प्रारंभ हुई। भव्य झांकियां, रंग-बिरंगी ध्वज-पताकाएं और संगीतमय भजन दल के साथ हजारों भक्तजन “जय श्री राम”, “जय हनुमान” के उद्घोष करते आगे बढ़े। यात्रा का मार्ग मूलगंज, लाटूश रोड, डिप्टी पड़ाव, चंद्रिका देवी, जरीब चौकी, दर्शनपुरवा, फजलगंज और विजयनगर से होता हुआ पनकी दरबार पहुंचा।
समिति के सदस्य मनीष दर्पण अग्रवाल ने बताया कि इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य बीते वर्ष की सभी भूल-चूक के लिए बजरंगबली से क्षमायाचना करना तथा नव वर्ष में देश-प्रदेश की समृद्धि, परिवारों में सुख-शांति की कामना करना है। यह यात्रा मंडल का बारहवां वार्षिकोत्सव भी थी, जो हर वर्ष बढ़ते उत्साह के साथ आयोजित की जाती है।
रास्ते में भक्तों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रियों का भव्य स्वागत किया। पनकी हनुमान मंदिर परिसर को फूलों, और रंगोलियों से सुंदर ढंग से सजाया गया था। मंदिर में पहुंचते ही भक्तों ने बाबा हनुमान को छप्पन भोग अर्पित किया। पंडित राम जी शुक्ला द्वारा संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ, जिसकी मधुर स्वर लहरियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मंदिर प्रांगण में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर बाबा का आशीर्वाद लिया। भंडारे में सभी वर्गों के लोग एकत्र होकर भक्ति रस में डूबे नजर आए। पदयात्रा में पंकज अग्रवाल, मनीष दर्पण, विवेक शुक्ला, अमित गुप्ता सहित मंडल के कई प्रमुख सदस्य सक्रिय रूप से शामिल रहे।
पनकी हनुमान मंदिर, जो अपनी चमत्कारिक मान्यताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है, ऐसे आयोजनों से और भी अधिक आस्था का केंद्र बन जाता है। भक्तों का मानना है कि यहां बजरंगबली की कृपा से हर मनोकामना पूरी होती है। इस पदयात्रा ने न केवल धार्मिक उत्साह जगाया, बल्कि नव वर्ष की शुरुआत को भक्ति और एकता के संदेश के साथ यादगार बना दिया।






