कानपुर रोहिंग्या मामला: इब्राहिम के खुलासे ने खोला मानव तस्करी और फर्जी आईडी का पर्दा

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन से तीन रोहिंग्या घुसपैठियों की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंकन्ना कर दिया है। गिरफ्तार मोहम्मद इब्राहिम, मोहम्मद हाशिम और उनकी नाबालिग साली (17 वर्षीय शौक तारा) से पूछताछ में मानव तस्करी के बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। इब्राहिम ने जम्मू-कश्मीर के आतंक प्रभावित इलाकों डोडा और किश्तवाड़ की यात्रा करने की बात कबूल की, साथ ही फर्जी भारतीय दस्तावेज बनाने वाले ठेकेदारों के नाम उगले। तीनों को जेल भेज दिया गया है, जबकि जांच अब कई जिलों तक फैल गई है।

गिरफ्तारी और शुरुआती पूछताछ
राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को रेल हेल्पलाइन के जरिए सूचना मिली थी कि ट्रेन के स्लीपर कोच में कुछ संदिग्ध लोग यात्रा कर रहे हैं। जांच में पता चला कि ये तीनों म्यांमार मूल के रोहिंग्या हैं, जो बांग्लादेश के शरणार्थी कैंप से भारत में अवैध रूप से घुसे थे। जीआरपी के क्षेत्राधिकारी दुष्यंत कुमार सिंह और सहायक सुरक्षा आयुक्त विवेक वर्मा की टीम ने पूरी रात पूछताछ की। इब्राहिम ने बताया कि 2017 में म्यांमार में हुई हिंसा में उसके माता-पिता की हत्या के बाद वह बांग्लादेश भाग गया था। 2024 में वह बॉर्डर पार कर भारत आया और जम्मू के नरवाल क्षेत्र में किराए के मकान में पत्नी व बच्ची के साथ रह रहा था।
चौंकाने वाली बात यह है कि इब्राहिम ने जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील और आतंक प्रभावित डोडा व किश्तवाड़ जिलों की यात्रा की थी। इन इलाकों में पहले भी रोहिंग्या घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

मानव तस्करी का गहरा नेटवर्क
पूछताछ में मानव तस्करी का बड़ा गिरोह उजागर हुआ है। नाबालिग लड़की की उम्र सिर्फ 17 साल होने से यह मामला और गंभीर हो गया। इब्राहिम ने कई ठेकेदारों के नाम बताए, जो रोहिंग्या को मजदूरी के लिए भारत लाते हैं और फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी आदि बनवाकर उन्हें स्थानीय निवासी दिखाते हैं। ये ठेकेदार लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज सहित कई जिलों में सक्रिय हैं।

इब्राहिम के अनुसार, इस बार उसे एक ठेकेदार ने 35 हजार रुपये दिए थे। वह बांग्लादेश के कैंप में गया, जहां हाशिम और उसकी साली मिले। दोनों को जम्मू के ठेकेदार शाकिर को सौंपना था, जो प्रति मजदूर 300 रुपये मासिक रखता है और 200 रुपये एजेंट को देता है। यह सिंडिकेट रोहिंग्या को सस्ती मजदूरी उपलब्ध कराने के नाम पर चल रहा है, लेकिन पीछे मानव तस्करी और अवैध घुसपैठ का खेल है। आरपीएफ ने यह जानकारी संबंधित जिलों की पुलिस से साझा की है।

पुराने मामले और बढ़ती चिंता
यह पहला मामला नहीं है। मई 2023 में यूपी एटीएस ने कानपुर के झकरकटी बस अड्डे से सात रोहिंग्या सहित आठ घुसपैठियों को पकड़ा था। वे त्रिपुरा से दिल्ली होते हुए जम्मू-कश्मीर जा रहे थे। जम्मू-कश्मीर में भी डोडा, किश्तवाड़, राजौरी आदि जिलों में रोहिंग्या पर क्रैकडाउन हुआ था, जहां फर्जी दस्तावेजों के साथ बसने वालों को पकड़ा गया।
यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। रोहिंग्या घुसपैठ न केवल जनसांख्यिकीय बदलाव ला रही है, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियों के लिए खतरा बन सकती है। उत्तर प्रदेश में चल रहे ‘ऑपरेशन टॉर्च’ जैसे अभियानों से अवैध घुसपैठियों की पहचान और निर्वासन तेज हुआ है। एजेंसियां अब इब्राहिम के बताए नामों पर छापेमारी की तैयारी कर रही हैं।

Pavan Singh
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