कानपुर देहात में मनरेगा घोटाला: 12 लाख की हाजिरी फर्जीवाड़े पर प्रधान-सचिव सहित आठ पर कार्रवाई
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर देहात ग्रामीण में रोजगार गारंटी योजना मनरेगा, जो गरीबों को 100 दिन का रोजगार देने का वादा करती है, एक बार फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। बिल्हौर ब्लॉक की रहीमपुर करीमपुर ग्राम पंचायत में करीब 12 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। जांच में पता चला कि फर्जी हाजिरी लगाकर दूर-दराज के गांवों के मजदूरों के नाम पर पैसा निकाला गया, जबकि जमीन पर एक भी विकास कार्य नहीं हुआ। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) दीक्षा जैन ने सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं, जिसमें प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ-साथ धन वसूली और संविदा कर्मियों की सेवा समाप्ति शामिल है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब ग्राम निवासी चंद्र कुमार कटियार ने एक माह पहले जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह से शिकायत की। आरोप था कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में मनरेगा कार्यों में फर्जी भुगतान किया गया। दूसरी ग्राम पंचायतों के मजदूरों के नाम से हाजिरी लगाकर मजदूरी का पैसा निकाला गया। डीएम के निर्देश पर परियोजना निदेशक आलोक कुमार और अधिशाषी अभियंता (आरईएस) की टीम ने गांव का दौरा कर जांच की।
जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कागजों पर 13 विकास कार्य दिखाए गए थे, जिनमें 80 मजदूरों को भुगतान किया गया। लेकिन ये मजदूर 20 से 30 किलोमीटर दूर बेरहमपुर, बिल्हौर देहात, खजुरी, कुदौरा, अरौल, वरंडा, रौगांव और खाड़ामऊ जैसे गांवों के रहने वाले थे। उनकी फर्जी हाजिरी लगाकर मानव दिवस गिने गए और खातों में पैसा ट्रांसफर कर दिया गया। मौके पर पहुंची टीम को एक भी कार्य पूरा नहीं मिला। कुल 12 लाख रुपये का गबन पाया गया।
दोषियों की सूची में ग्राम प्रधान विनोद कुमार, सचिव रवि यादव, तकनीकी सहायक प्रमोद कुमार प्रमुख हैं। इनके अलावा तत्कालीन बीडीओ आशीष मिश्रा और बलराम, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी प्रीति अग्निहोत्री, लेखाकार देवेंद्र शर्मा तथा कंप्यूटर ऑपरेटर ललित कुमार भी दोषी ठहराए गए। सीडीओ दीक्षा जैन के आदेशानुसार प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक से बराबर-बराबर 404356 रुपये की वसूली होगी। बीडीओ आशीष मिश्रा पर 11400 रुपये, बलराम पर 13800 रुपये, एपीओ व लेखाकार पर 24200-24200 रुपये तथा कंप्यूटर ऑपरेटर पर 1000 रुपये जुर्माना लगाया गया है। साथ ही, सीआईबी बोर्ड स्थापना न कराने पर इनसे 1.16 लाख रुपये अतिरिक्त वसूली होगी। संविदा कर्मियों की सेवा तत्काल समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में मनरेगा घोटालों की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसी बिल्हौर ब्लॉक के सैबसू क्षेत्र में बिना कार्य के 20 लाख रुपये का गबन हुआ था, लेकिन वहां अब तक प्रधान-सचिव पर एफआईआर तो दर्ज हुई, मगर विभागीय कार्रवाई नहीं हुई। संविदा कर्मी अभी भी काम कर रहे हैं। सीडीओ दीक्षा जैन ने स्पष्ट कहा, “रहीमपुर-करीमपुर में तीन पर रिपोर्ट दर्ज होगी, संविदा कर्मियों को हटाया जाएगा। सैबसू में भी जल्द कार्रवाई होगी। सचिवों पर एक्शन के लिए डीडीओ को निर्देश दे दिए गए हैं।”
यह घटना मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर करती है। जहां एक तरफ गरीब मजदूर काम की तलाश में भटकते हैं, वहीं कागजी खेल से सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। प्रशासन की सख्ती सराहनीय है, लेकिन जरूरत है ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पारदर्शी निगरानी और तकनीक का बेहतर उपयोग की। उम्मीद है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई से अन्य को सबक मिलेगा और योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचेगा।






