कानपुर में फर्जी नंबर प्लेट का खेल: आरपीएफ अधिकारी की स्कूटी से ट्रैफिक पुलिस को चकमा!
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संवाद 24 संवाददाता। यातायात नियमों को ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ने वाले शातिरों ने अब नया जुगाड़ निकाला है। फर्जी नंबर प्लेट लगाकर वे ट्रैफिक पुलिस की नजरों से बच रहे हैं और चालान का बोझ निर्दोष लोगों पर डाल रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी की स्कूटी की नंबर प्लेट का दुरुपयोग कर कानपुर की सड़कों पर अपाचे बाइक घुमाई जा रही है।
यह मामला तब खुला जब बंगाल में तैनात आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त (सीओ) को अपनी स्कूटी पर कानपुर में कटे चालानों के मैसेज आए। हैरानी की बात यह है कि उनकी स्कूटी पिछले चार साल से अलीगढ़ में खड़ी है और परिवार वाले उसे इस्तेमाल करते हैं। स्कूटी उनकी पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड है। चालान का मैसेज आने पर सीओ ने जांच की तो पता चला कि कोई शख्स उनकी स्कूटी की नंबर प्लेट की डुप्लीकेट प्लेट लगाकर अपाचे बाइक पर कानपुर में घूम रहा है और ट्रैफिक नियम तोड़ रहा है।
सीओ ने बताया कि कानपुर में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने पत्नी के नाम पर यह स्कूटी खरीदी थी। बाद में 2022 में अलीगढ़ जंक्शन पर आरपीएफ थाना प्रभारी के रूप में पोस्टिंग मिली। परिवार अलीगढ़ शिफ्ट हो गया और स्कूटी भी वहीं चली गई। तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर प्रमोशन के साथ बंगाल में सीओ के पद पर तैनाती मिली, लेकिन परिवार अभी भी अलीगढ़ में ही है। स्कूटी पर अब कई चालान हो चुके हैं, जो वास्तव में अपाचे बाइक के हैं।
पीड़ित अधिकारी ने ऑनलाइन पोर्टल और परिवहन विभाग में शिकायत दर्ज कराई है। डीसीपी यातायात रवींद्र कुमार ने कहा कि अभी तक लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन जांच कर चालान निरस्त कराए जाएंगे।
यह घटना यातायात नियमों के उल्लंघन में फर्जीवाड़े की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) अनिवार्य होने के बावजूद ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। फर्जी प्लेट से न केवल निर्दोष लोग परेशान हो रहे हैं, बल्कि अपराधी आसानी से बच निकल रहे हैं। पुलिस को चाहिए कि सीसीटीवी फुटेज और चालान की तस्वीरों से असली वाहन की पहचान कर दोषियों तक पहुंचे।
ऐसे मामलों से बचने के लिए वाहन मालिकों को सलाह है कि नियमित रूप से ई-चालान पोर्टल चेक करें और संदिग्ध चालान मिलने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। आखिर, सड़क सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी है – फर्जीवाड़े से नहीं, नियमों के पालन से ही इसे मजबूत किया जा सकता है।






