माल रोड की नियति: खोदाई से खोदाई तक, राहत का इंतजार बेकार
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर की माल रोड, शहर की शान और व्यस्ततम सड़कों में से एक। कभी ब्रिटिश काल की याद दिलाती यह सड़क आज विकास के नाम पर बार-बार खोदाई की शिकार हो रही है। मेट्रो कार्य पूरा होने के मात्र छह महीने बाद अब उत्तर प्रदेश जल निगम ने यहां मुख्य पाइपलाइन (राइजिंग मेन) बिछाने के लिए खोदाई शुरू कर दी है। नतीजा? फूलबाग चौराहे से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) तक जगह-जगह गड्ढे, धूल का गुबार और लंबा जाम। राहगीर, दुकानदार और स्थानीय निवासी फिर से परेशान हैं।
साढ़े तीन साल तक चले मेट्रो कार्य ने माल रोड को छलनी कर दिया था।उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने चुन्नीगंज से नरोना चौराहे तक भूमिगत स्टेशन और ट्रैक बनाने के लिए जगह-जगह खोदाई की। बैरिकेडिंग, यातायात डायवर्शन और जाम ने लाखों शहरवासियों की जिंदगी मुश्किल कर दी। कार्य पूरा होने के बाद सड़क को चमकदार बनाया गया, लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिकी। अब जल निगम ने ट्रंचलेस तकनीक से नई पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया है।
ट्रंचलेस तकनीक का मतलब है कि पूरी सड़क नहीं खोदी जाती, बल्कि हर 25-25 मीटर पर गड्ढे बनाकर विशेष मशीन से地下 खोदाई कर पाइप डाले जाते हैं। यह तकनीक कम नुकसान पहुंचाती है, लेकिन फिर भी गड्ढों और मशीनरी की वजह से यातायात प्रभावित हो रहा है। कंपनीबाग चौराहे से फूलबाग स्थित इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस) तक पुरानी घटिया पाइपलाइन के समानांतर नई लाइन बिछाई जा रही है, ताकि गंगा बैराज जल शोधन संयंत्र से पानी सुचारु रूप से पहुंच सके। जल निगम के अवर अभियंता योगेंद्र कुमार के अनुसार, कंपनीबाग से चुन्नीगंज तक 2200 मीटर पाइपलाइन बिछ चुकी है और अगले साल जून तक पूरा काम खत्म हो जाएगा।
लेकिन इस विकास के नाम पर हो रही परेशानी से स्थानीय लोग बेहाल हैं। वर्कशॉप संचालक मोहम्मद सरफराज कहते हैं, “मेट्रो के बाद लगा था कि अब राहत मिलेगी, लेकिन जल निगम ने फिर सड़क खोद दी। व्यापार चौपट हो रहा है।” माल रोड निवासी रोहित कन्नौजिया बताते हैं, “सुबह-शाम जाम लगता है, बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो गया है। काम भी तेजी से नहीं हो रहा।” ऑफिस जाने वाली मंजू देवी कहती हैं, “जाम की वजह से देरी होती है, डांट सुननी पड़ती है।” दुकानदार राम प्रकाश तो दुकान बंद करने को मजबूर हो गए, “मेरी दुकान के सामने गड्ढा खोद दिया, ग्राहक नहीं आ रहे। हर साल यही होता है, निजात कब मिलेगी?
यह समस्या सिर्फ माल रोड तक सीमित नहीं। कानपुर में विकास परियोजनाओं के बीच समन्वय की कमी बार-बार सामने आती है। मेट्रो, जल निगम, नगर निगम और अन्य विभागों के बीच तालमेल न होने से सड़कें बार-बार खोदी जाती हैं। जरूरत है एक समन्वित योजना की, जहां सभी यूटिलिटी कार्य एक साथ हो जाएं, ताकि शहरवासी बार-बार जाम, धूल और हादसों के खतरे से न जूझें।
माल रोड की यह कहानी कानपुर के विकास की कड़वी सच्चाई बयां करती है – जहां राहत मिलने से पहले फिर परेशानी शुरू हो जाती है। उम्मीद है, जल निगम काम जल्द पूरा करेगा और सड़क फिर चमकदार बनेगी। लेकिन सवाल यह है: अगला विभाग कब खोदाई शुरू करेगा।






