कानपुर: छह महीने पुरानी सराफा दुकान चोरी का खुलासा, दो शातिर आरोपी गिरफ्तार, जेवरात और बाइक बरामद
Share your love

संवाद 24 संवाददाता। चकेरी पुलिस ने मेहनत और तकनीकी जांच की बदौलत छह महीने पहले हुई एक बड़ी चोरी का राजफाश कर दिया है। अहिरवां क्षेत्र में सराफा व्यापारी की दुकान से करीब 10 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवर चोरी करने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के पास से चोरी के जेवरात, रंगीन नग और वारदात में इस्तेमाल हुई बाइक भी बरामद कर ली गई है। दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
घटना की याद ताजा करें तो पिछले साल 5 मई की देर रात अहिरवां के सदानंद नगर निवासी संतोष स्वर्णकार की सराफा दुकान को चोरों ने निशाना बनाया था। चोर दुकान के बगल वाली गैलरी में घुसे, फिर चैनल गेट और शटर तोड़कर अंदर दाखिल हुए। वहां से उन्होंने करीब 10 लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण चुरा लिए। सुबह जब व्यापारी दुकान पहुंचे तो चोरी का पता चला और तुरंत चकेरी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
पुलिस ने शुरुआत से ही मामले को गंभीरता से लिया। थाना प्रभारी अजाय प्रकाश मिश्र के नेतृत्व में टीम ने सीसीटीवी फुटेज का गहन विश्लेषण किया और संदिग्धों की तलाश शुरू की। महीनों की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार सफलता मिली। गुरुवार देर रात मंगला विहार स्थित बड़ी पुलिया के पास नौबस्ता की ओर से आ रही एक बाइक पर सवार दो युवकों को पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ लिया।
पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपक सोनकर (मूल निवासी बांदा के जुहारपुर, हाल निवासी मेहरबान सिंह का पुरवा, तात्याटोपे नगर) और विशाल (मूल निवासी अमेठी के विशेशरगंज, हाल निवासी नौबस्ता कच्ची बस्ती) के रूप में हुई है। दोनों ने कबूल किया कि उन्होंने ही अहिरवां में सराफा दुकान से चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने उनके पास से चोरी गए अधिकांश जेवरात, कई रंगों के नग और वारदात वाली बाइक बरामद कर ली।
थाना प्रभारी अजाय प्रकाश मिश्र ने बताया कि दोनों आरोपी पहले भी छोटे-मोटे अपराधों में शामिल रहे हैं। इस सफलता से न केवल व्यापारी संतोष स्वर्णकार को राहत मिली है, बल्कि क्षेत्र में पुलिस की सतर्कता का संदेश भी गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि कहीं ये आरोपी अन्य चोरी की घटनाओं में भी तो शामिल नहीं हैं।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अपराधी कितने भी शातिर क्यों न हों, पुलिस की लगन और तकनीक के सामने अंततः उन्हें सरेंडर करना पड़ता है। क्षेत्रवासियों ने पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है।






