नियमितीकरण और मानदेय की मांग को लेकर डीएम कार्यालय पर आशाओं का प्रदर्शन
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर देहात में आशा कर्मियों का आक्रोश गुरुवार को खुलकर सामने आया। बीते चार दिनों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर धरना दे रहीं आशा कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर डीएम कार्यालय पहुंच गईं। आशा यूनियन के बैनर तले जुटीं सैकड़ों आशाओं ने जोरदार नारेबाजी करते हुए नियमितीकरण और मानदेय व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
गुरुवार दोपहर आशा कर्मी कलेक्ट्रेट पहुंचीं और जिलाधिकारी से सीधे मुलाकात की मांग पर अड़ गईं। उस समय डीएम शासन की वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक में व्यस्त थे। स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट देशदीपक मौके पर पहुंचे और आशाओं से कलेक्ट्रेट परिसर के दूसरी ओर बने निर्धारित धरना स्थल पर जाने का अनुरोध किया। हालांकि आशा कर्मी बिना डीएम से मिले लौटने को तैयार नहीं हुईं और अपनी मांगों पर डटी रहीं।
आशाओं का कहना है कि उनसे स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लगभग सभी कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो उनका नियमितीकरण किया जा रहा है और न ही मानदेय की स्थायी और समयबद्ध व्यवस्था है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, काम के घंटे तय नहीं हैं और जिम्मेदारियां बढ़ती जा रही हैं, जबकि सुविधाएं और सम्मान उसी अनुपात में नहीं मिल रहा।
कड़ाके की सर्दी के बावजूद आशा कर्मियों ने डीएम कार्यालय पर डटे रहकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को दोहराया। आशाओं का साफ कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
यह प्रदर्शन न केवल आशा कर्मियों की पीड़ा को उजागर करता है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की उस नींव पर भी सवाल खड़े करता है, जिस पर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं टिकी हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन उनकी मांगों को लेकर क्या कदम उठाता है।






