फर्जी डिग्री से वकालत: कानपुर के 25 हजार इनामी आशीष शुक्ला की गिरफ्तारी
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संवाद 24 संवाददाता। फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों का सहारा लेकर वकालत की दुनिया में घुसपैठ करने वाले एक शातिर अपराधी की तलाश आखिरकार खत्म हो गई। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बुधवार को उत्तराखंड के नैनीताल जिले के तल्लीताल इलाके से 25 हजार रुपये के इनामी आशीष शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया। आशीष पर आरोप है कि इंटरमीडिएट में फेल होने के बावजूद उसने फर्जी मार्कशीट बनवाकर स्नातक और फिर एलएलबी की डिग्री हासिल की, और बार काउंसिल में पंजीकरण कराकर अधिवक्ता बन गया।
यह मामला तब सामने आया जब कानपुर बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री और श्याम नगर निवासी अधिवक्ता अरिदमन सिंह ने नौ महीने पहले कोतवाली थाने में आशीष शुक्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। शिकायत में कहा गया था कि आजाद नगर निवासी आशीष ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए न केवल उच्च शिक्षा प्राप्त की, बल्कि न्याय व्यवस्था में भी प्रवेश कर लिया। जांच के दौरान जब पुलिस ने उसके मूल शैक्षिक प्रमाणपत्र मांगे, तो वह हर बार बहाने बनाकर टालता रहा—कभी दस्तावेज गिरने की बात, तो कभी मकान बदलने के कारण गायब होने की कहानी।
मामला गंभीर होने पर कोर्ट ने 21 नवंबर को आशीष के खिलाफ गैर-जमानतीय वारंट जारी किया। इससे पहले उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी 18 नवंबर को खारिज हो चुकी थी। तब से वह फरार चल रहा था। कोतवाली पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम उसकी तलाश में जुटी थी। सर्विलांस और तकनीकी खुफिया जानकारी से पता चला कि उसकी लोकेशन नैनीताल की ओर है। आखिरकार, बुधवार को एसटीएफ ने उसे दबोच लिया।
आशीष शुक्ला का आपराधिक रिकॉर्ड भी कोई कम नहीं है। उसके खिलाफ कानपुर के स्वरूप नगर, काकादेव, नवाबगंज और कल्याणपुर थानों में हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और मारपीट जैसी गंभीर धाराओं में कुल छह मुकदमे दर्ज हैं। यह गिरफ्तारी न केवल एक व्यक्तिगत अपराधी की धरपकड़ है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था में फर्जीवाड़े की गहरी सेंध को उजागर करती है।
यह घटना एक बार फिर सवाल उठाती है कि फर्जी डिग्रियों का कारोबार कितनी आसानी से फल-फूल रहा है। कानपुर में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं जहां अपराधी काले कोट का सहारा लेकर अपनी गतिविधियों को छिपाते रहे हैं। बार काउंसिल और शैक्षिक संस्थानों को सख्त जांच प्रक्रिया अपनानी होगी, ताकि न्याय का मंदिर अयोग्यों के हाथों कलंकित न हो। एसटीएफ की इस कार्रवाई से उम्मीद जगती है कि ऐसे तत्वों पर लगाम कसी जाएगी।
आशीष शुक्ला अब न्याय के कठघरे में है। उसकी गिरफ्तारी से जुड़े आगे के खुलासे शायद फर्जी डिग्री रैकेट के बड़े नेटवर्क को बेनकाब करेंगे।






