970 करोड़ की अंतरराष्ट्रीय ठगी: एक लाइसेंस, कई कंपनियां और हजारों पीड़ित, महाठग रवींद्रनाथ सोनी पर शिकंजा कसता जा रहा
Share your love

संवाद 24 संवाददाता। 10 देशों में फैले 1000 से अधिक लोगों से करीब 970 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले महाठग रवींद्रनाथ सोनी के खिलाफ जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब तक उसके खिलाफ 10 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पुलिस अधिकारियों का अनुमान है कि यह आंकड़ा 1500 से भी ज्यादा पहुंच सकता है।
मंगलवार को एक महिला समेत तीन नए पीड़ितों ने पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर अपनी शिकायतें सौंपीं। इसी बीच एसआईटी जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि रवींद्रनाथ सोनी के पास वास्तव में सिर्फ चार-पांच कंपनियों के लाइसेंस थे, लेकिन वह हर एक लाइसेंस पर नाम बदल-बदलकर चार से पांच अलग-अलग कंपनियां चलाता था। इसी जाल के जरिए वह निवेशकों को झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करता रहा।
एक ही लाइसेंस से कई कंपनियों का खेल
जांच में सामने आया है कि ठग गिरोह की कंपनियां दिखने में अलग-अलग थीं, लेकिन उनका संचालन और नियंत्रण एक ही नेटवर्क से होता था। निवेशकों को ऊंचे मुनाफे, सुरक्षित निवेश और नामी हस्तियों के प्रचार के जरिए फंसाया जाता था। कंपनियों में 100 से अधिक कर्मचारी काम करते थे, जिन्हें वेतन के साथ-साथ इंसेंटिव भी दिया जाता था। यह इंसेंटिव सीधे तौर पर इस बात पर निर्भर करता था कि वे कितनी ठगी की रकम जमा करवा पाते हैं।
पीड़ितों की बढ़ती कतार
दिल्ली के मालवीय नगर निवासी रवींद्रनाथ सोनी के खिलाफ लखनऊ की एक महिला निवेशक ने पुलिस आयुक्त को बताया कि ब्लूचिप कंपनी में निवेश कराने के नाम पर उससे करीब 16 लाख रुपये ठग लिए गए। इसी तरह बुलंदशहर के जहांगीराबाद के साखनी गांव निवासी साबित अली और वाराणसी के चंदौली निवासी अनुपम ने भी तहरीर देकर अपने साथ हुई धोखाधड़ी की जानकारी दी।
चर्चित चेहरों को तीसरा नोटिस
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अभिनेता सोनू सूद, अभिनेता सूरज जुमानी और रेसलर खली को तीसरा नोटिस भेजा गया है। दो मुकदमों में अभिनेता सूरज जुमानी को पहले ही आरोपी बनाया जा चुका है। एसआईटी यह जांच कर रही है कि प्रचार और ब्रांड एंबेसडर की भूमिका में इन हस्तियों की संलिप्तता किस स्तर तक रही।
देहरादून से मिले अहम साक्ष्य
एसआईटी ने महाठग के देहरादून स्थित घर से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों का गहन विश्लेषण शुरू कर दिया है। ई-मेल, डिजिटल ट्रांजैक्शन, कंपनी रिकॉर्ड और विदेशी निवेश से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं।
पुलिस आयुक्त ने सभी पीड़ितों को निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जिस तेजी से नए पीड़ित सामने आ रहे हैं, उससे यह साफ है कि यह मामला देश की अब तक की सबसे बड़ी संगठित निवेश ठगी में शामिल हो सकता है। जांच एजेंसियों के लिए अब असली चुनौती पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर पीड़ितों की रकम वापस दिलाने की है।






