मां का दर्द और एक मासूम जिंदगी का अंत: प्रखर त्रिवेदी की मौत का रहस्य

संवाद 24 संवाददाता। कानपुर के नवाबगंज क्षेत्र में स्थित एनआरआई सिटी सोसाइटी की नौवीं मंजिल से मंगलवार को 13 वर्षीय प्रखर त्रिवेदी ने कूदकर अपनी जान दे दी। यह घटना न केवल एक परिवार को तोड़कर रख देने वाली है, बल्कि समाज में बच्चों पर बढ़ते मानसिक दबाव और पारिवारिक विवादों के गंभीर प्रभाव को उजागर करती है। प्रखर आठवीं कक्षा का छात्र था, जिसकी जिंदगी अभी-अभी खिलने की उम्र में थी, लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि उसने इतना कठोर कदम उठा लिया।


पोस्टमॉर्टम हाउस में बेटे के शव से लिपटकर रोती-बिलखती मां बोस्की त्रिवेदी का दर्द देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। मां ने साफ-साफ कहा, “हाय मेरे लाल… तुम मुझे छोड़कर कहां चले गए? मैं जानती हूं, तुम आत्महत्या नहीं कर सकते। तुम्हारी हत्या हुई है। यह वही लोग हैं जिन्होंने मुझे तुमसे दूर किया था। मैं उन हत्यारों को कभी माफ नहीं कर सकती।” बोस्की त्रिवेदी ने अपने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि साल 2021 से उनके पति सुधांशु त्रिवेदी (जो पेशे से अधिवक्ता हैं) से विवाद चल रहा है। घरेलू हिंसा, दहेज और तलाक के मुकदमे कोर्ट में लंबित हैं। पिछले चार साल से बोस्की अपने मायके कल्याणपुर में रह रही हैं।


आरोप गंभीर हैं—ससुराल पक्ष ने प्रखर और उसकी सात साल की छोटी बहन को मां से मिलने नहीं दिया। यहां तक कि प्रखर के जन्मदिन पर भी मुलाकात की अनुमति नहीं मिली। हालांकि कोर्ट ने महीने में दो बार मुलाकात का आदेश दिया था, लेकिन यह बंदिश प्रखर पर भारी पड़ रही थी। उसके दोस्तों ने बताया कि मां से न मिल पाने की वजह से वह अक्सर गुमसुम और उदास रहता था। सोसाइटी के लोगों से मौत की खबर मिलते ही बोस्की अपने पिता डॉ. आरएन त्रिवेदी और मां निशा के साथ पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचीं। वहां उनका रो-रोकर बुरा हाल था।


दूसरी ओर, पुलिस जांच में सामने आया कि घटना से कुछ घंटे पहले प्रखर के ट्यूशन टीचर ने होमवर्क न करने की शिकायत उसकी दादी से की थी। क्या यह छोटी-सी बात इतनी बड़ी वजह बन गई? या परिवारिक कलह का बोझ बच्चे के नाजुक कंधों पर इतना भारी हो गया कि वह सह नहीं सका? प्रखर के पिता सुधांशु त्रिवेदी और दादा राजकिशोर त्रिवेदी (पूर्व वरिष्ठ अधिवक्ता) घटना से गहरे सदमे में हैं। नवाबगंज पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।


यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है। आज के दौर में बच्चे कितने दबाव में जी रहे हैं—पढ़ाई का तनाव, पारिवारिक झगड़े, माता-पिता का अलगाव। एक मासूम बच्चा, जो अभी दुनिया को समझने की उम्र में था, कैसे इतने बड़े फैसले तक पहुंच गया? मां का आरोप हत्या का है, पुलिस आत्महत्या की जांच कर रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि समाज और परिवार बच्चों की मानसिक सेहत को कितना महत्व देते हैं।

Pavan Singh
Pavan Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News