कानपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में उभरे गंभीर आरोप: छात्राओं की सुरक्षा और संस्थान की जवाबदेही पर सवाल
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संवाद 24 संवाददाता। शहर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शुमार कानपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (केआईटी) इन दिनों विवादों के घेरे में है। संस्थान में चल रहे ‘ऑटोनॉमस’ स्टेटस को लेकर छात्रों के लंबे प्रदर्शन के बीच अब एक नया और गंभीर मामला सामने आया है। एक छात्रा ने संस्थान के एक विभागाध्यक्ष (एचओडी) पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। छात्रा का दावा है कि विभागाध्यक्ष उन्हें निजी और आपत्तिजनक संदेश भेजते थे, व्यक्तिगत जीवन से जुड़े निजी सवाल पूछते थे और फिर उन्हें अकेले में अपने कार्यालय में बुलाते थे।
छात्रा ने आगे आरोप लगाया कि यह व्यवहार केवल उनके साथ ही नहीं, बल्कि कई अन्य छात्राओं के साथ भी किया जा रहा था। खास तौर पर प्रथम वर्ष की छात्राओं को निशाना बनाया जाता था। यह आरोप संस्थान के उस माहौल पर गंभीर सवाल उठाते हैं जहां छात्राएं सुरक्षित महसूस करने की बजाय डर और दबाव का शिकार हो रही हैं।
हालांकि, इस मामले में अभी तक छात्रा की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। किसी अन्य छात्रा ने भी इन आरोपों की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है। संस्थान के निदेशक प्रो. ब्रजेश वार्ष्णेय ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि ये दावे निराधार हैं और छात्रा या किसी अन्य ने पहले कभी इस संबंध में कोई शिकायत नहीं की।
इसके साथ ही छात्राओं ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। ऑटोनॉमस स्टेटस को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें हॉस्टल में जबरन बंद रखा गया। छात्राओं का कहना है कि उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने आवाज उठाई तो उनका भविष्य बर्बाद कर दिया जाएगा। यह दावा संस्थान के प्रबंधन की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। छात्राओं ने इस मामले में लिखित शिकायत एडीसीपी को सौंपी है, जो जांच का आधार बन सकती है।
यह विवाद इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि हाल ही में केआईटी में ऑटोनॉमस स्टेटस को लेकर छात्रों का आंदोलन उग्र रूप ले चुका है। छात्रों का आरोप है कि प्रवेश के समय संस्थान ने खुद को स्वायत्त (ऑटोनॉमस) बताकर अधिक फीस वसूली, बेहतर प्लेसमेंट और परीक्षा पैटर्न का लालच दिया, लेकिन अब एकेटीयू (AKTU) के नियम लागू कर दिए गए हैं। इस धोखे से नाराज छात्रों ने प्रदर्शन किया, तोड़फोड़ की और यहां तक कि कॉन्फ्रेंस रूम में आग भी लगा दी।
शैक्षणिक संस्थान छात्रों के लिए सुरक्षित और प्रेरणादायी जगह होने चाहिए, न कि डर और दबाव का केंद्र। यौन उत्पीड़न जैसे आरोप बेहद संवेदनशील होते हैं और इनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि आरोप साबित होते हैं तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि निराधार पाए जाते हैं तो आरोप लगाने वालों की मंशा पर भी सवाल उठेंगे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल संस्थान की आंतरिक शिकायत तंत्र पर है—क्या छात्राएं बिना डर के शिकायत दर्ज करा सकती हैं?
यह मामला केवल केआईटी तक सीमित नहीं है। देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और उत्पीड़न के मामलों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों के बावजूद कई जगहों पर आंतरिक शिकायत समितियां प्रभावी नहीं हो पातीं। केआईटी प्रबंधन को चाहिए कि वह पारदर्शी जांच कराए और छात्रों का विश्वास बहाल करे।
आखिर में, शिक्षा का माहौल डर पर नहीं, सम्मान और समानता पर टिका होना चाहिए। उम्मीद है कि यह विवाद जल्द सुलझे और संस्थान छात्रों, खासकर छात्राओं के लिए वाकई सुरक्षित जगह बने।






