कानपुर में दबंगई की हदें पार: भूमाफिया के बेटे का आतंक, युवक को बेल्ट-चप्पलों से पीटा, सड़क पर निकाला जुलूस
Share your love

संवाद 24 संवाददाता। कानपुर में दबंगई और कानून को ठेंगा दिखाने का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। भूमाफिया लाली शुक्ला के बेटे आयुष शुक्ला का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपने साथियों के साथ एक युवक को बेरहमी से पीटता नजर आ रहा है। वीडियो में युवक को बेल्ट और चप्पलों से पीटा जा रहा है और सड़क पर उसका जुलूस निकाला जा रहा है।
करीब 48 सेकंड के इस वीडियो में साफ दिखाई देता है कि युवक को पहले पकड़कर सड़क पर घसीटा जाता है, फिर आयुष शुक्ला बेल्ट से ताबड़तोड़ वार करता है। गिनती के अनुसार बेल्ट से 17 बार और चप्पल से 10 बार हमला किया गया। इस दौरान आरोपी युवक को धमकाते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं और उसे जान से मारने की धमकी तक देते हैं। मारपीट के बाद पीड़ित को डरा-धमकाकर मौके से भगा दिया जाता है।
बताया जा रहा है कि आयुष शुक्ला के साथ उसका चचेरा भाई तुषार और एक अन्य युवक भी इस बर्बरता में शामिल था। वीडियो में तीनों की दबंगई और बेखौफ रवैया साफ झलकता है। हालांकि लाइव हिन्दुस्तान वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
कल्याणपुर थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले पर इंस्पेक्टर का कहना है कि वीडियो कब का है, इसकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। पीड़ित की ओर से अब तक कोई तहरीर भी नहीं दी गई है, इसके बावजूद वायरल वीडियो के आधार पर दबिश दी जा रही है।
गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है। करीब एक साल पहले भी आयुष शुक्ला और उसके साथियों ने बी-फार्मा के एक छात्र को बेरहमी से पीटा था। उस दौरान छात्र को नग्न कर, चेहरे पर जूते रगड़े गए और जूते चटवाए गए थे। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने छात्र को लखनऊ से बुलाकर तहरीर ली थी और आयुष शुक्ला, तुषार समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन सात साल से कम सजा के प्रावधान के चलते आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई।
आयुष शुक्ला के पिता लाली शुक्ला पहले से ही विवादों में घिरे रहे हैं। उनके खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और ‘ऑपरेशन महाकाल’ के दौरान भी कार्रवाई हो चुकी है। इसके बावजूद बेटे की दबंगई और खुलेआम गुंडई ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह मामला सिर्फ एक युवक की पिटाई का नहीं, बल्कि सिस्टम के सामने खड़ी उस चुनौती का प्रतीक है, जिसमें रसूखदारों के हौसले इतने बुलंद हो जाते हैं कि वे सरेआम कानून को रौंदते नजर आते हैं। अब देखना यह है कि पुलिस इस बार कितनी सख्ती दिखाती है और पीड़ित को न्याय कब तक मिलता है।






