पीएफ के नए नियम ने बदला हजारों कर्मचारियों का फैसला : नौकरी छोड़ने का इरादा छोड़ा, पेंशन बचाई
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संवाद 24 संवाददाता। कभी नौकरी छोड़ते ही पूरा पीएफ निकाल लेने की जल्दबाजी में लोग अपना रिटायरमेंट फंड खत्म कर देते थे। लेकिन अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के बदले नियम ने यह सिलसिला थाम दिया है। नए नियम के तहत बेरोजगारी में पीएफ का 75 प्रतिशत तो तुरंत निकाल सकते हैं, लेकिन बाकी 25 प्रतिशत निकालने के लिए पूरे एक साल इंतजार करना पड़ता है। इस एक साल की “ठंडक” ने हजारों कर्मचारियों को फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया और नौकरी छोड़ने का इरादा त्यागकर दोबारा जॉब जॉइन कर ली।
कानपुर रीजनल पीएफ ऑफिस के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। पिछले कुछ महीनों में जिन सात हजार कर्मचारियों ने बेरोजगारी में पूरा पीएफ निकालने के लिए आवेदन किया था, उनमें से करीब पांच हजार ने अपना इरादा बदल दिया। वजह साफ है – 25 प्रतिशत रकम को एक साल तक अकाउंट में छोड़ने से अगर बीच में कोई नई नौकरी मिल जाए तो पुराना बैलेंस भी जुड़ जाता है और उस पर मिलने वाला ब्याज भी बचा रहता है। नतीजा : रिटायरमेंट कॉर्पस बड़ा होता है, पेंशन ज्यादा मिलती है।
दो सच्ची कहानियाँ जो नियम की ताकत बयां करती हैं
विकास अरोड़ा (गुरुग्राम से कानपुर आए) ने आईटी जॉब छोड़कर शहर में रेस्टोरेंट खोलने का प्लान बनाया। पूरा पीएफ निकालने आवेदन कर दिया। 75 प्रतिशत रकम तो मिल भी गई, लेकिन बाकी 25 प्रतिशत के लिए एक साल का इंतजार देखकर उन्होंने सोचा – “अगर इसी बीच कोई अच्छी जॉब मिल जाए तो?” नतीजा यह हुआ कि दो महीने बाद ही उन्होंने एक नई कंपनी जॉइन कर ली। अब उनका पुराना 25 प्रतिशत भी नई जॉब के पीएफ से जुड़ गया और ब्याज भी पूरा मिल रहा है। विकास कहते हैं, “अगर पुराना नियम होता तो मैं सब निकाल लेता और नई जॉब में ब्याज कम मिलता। यह एक साल का गैप मेरे लिए वरदान साबित हुआ।”
इसी तरह बेंगलुरु की एक बड़ी आईटी कंपनी में काम करने वाले अजीत कुमार ने भी इस्तीफा दे दिया था। पीएफ निकालने आवेदन किया, लेकिन 25 प्रतिशत के लिए एक साल का नियम देखकर रुक गए। इसी बीच कंपनी ने उन्हें बेहतर सैलरी पैकेज के साथ दोबारा बुला लिया। अजीत ने हंसते हुए कहते हैं, “मैं तो रिटायरमेंट तक यहीं नौकरी करने का प्लान बना चुका हूं। 75 प्रतिशत से घर का काम चला लिया, बाकी 25 प्रतिशत अब पेंशन के लिए सुरक्षित है।”
नए नियम की खास बातें एक नजर में
75% पीएफ निकासी → अब कोई 2 महीने का वेटिंग पीरियड नहीं। आवेदन करते ही पैसे आ जाते हैं।
बाकी 25% निकालने के लिए → 1 साल इंतजार जरूरी।
अगर इस 1 साल में नौकरी जॉइन कर ली → पुराना 25% भी नए अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है, ब्याज बना रहता है।
रिटायरमेंट तक पैसा रहेगा तो पेंशन बढ़ेगी, परिवार को भी ज्यादा फायदा।
रीजनल पीएफ कमिश्नर-प्रथम शाहिद इकबाल कहते हैं, “इस नियम का मकसद यही था कि कर्मचारी जल्दबाजी में अपना रिटायरमेंट फंड न उड़ा दें। एक साल का समय उन्हें दोबारा सोचने का मौका देता है। साथ ही कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को मिलने वाली पेंशन भी ज्यादा सुरक्षित और बड़ी होती है। कानपुर परिक्षेत्र में ही नहीं, पूरे देश में यह नियम हजारों-लाखों कर्मचारियों की जिंदगी बदल रहा है।”
सचमुच, कभी लगने वाला “सख्त” नियम आज लाखों कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा वेलकम सरप्राइज बन गया है।
नौकरी बची, पीएफ बचा और आने वाली जिंदगी की टेंशन भी कम हो गई।






