कानपुर: ‘ताजमहल’ फिल्म के सह-निर्माता पर 3.30 करोड़ की ठगी और 60 लाख की रंगदारी का आरोप
Share your love

संवाद 24 संवाददाता। बॉलीवुड की साल 2005 में रिलीज हुई फिल्म ‘ताजमहल : अन एटरनल लव स्टोरी’ के सह-निर्माता इरशाद आलम एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार फिल्मी ग्लैमर की वजह से नहीं, बल्कि कथित तौर पर 3.30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और 60 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के गंभीर आरोपों के कारण। बेकनगंज थाना क्षेत्र में दर्ज मुकदमे ने इरशाद आलम के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को भी फिर से खोल दिया है।
क्या है पूरा मामला? सिविल लाइंस निवासी पोल्ट्री कारोबारी मोहम्मद शोएब और उनके साथी फहद नसीम व उबैद नसीम को व्यापार विस्तार के लिए जाजमऊ क्षेत्र में गोदाम के लिए जमीन चाहिए थी। दो दलाल रिक्की और रफी ने उनकी मुलाकात जाजमऊ गज्जूपुरवा (वर्तमान पता सिग्नेचर सिटी) निवासी इरशाद आलम से कराई। इरशाद ने खुद को टेनरी कारोबारी बताया और साथ ही 2005 की फिल्म ‘ताजमहल’ का सह-निर्माता होने का दावा किया।
शोएब के अनुसार, इरशाद ने उन्हें जाजमऊ गज्जूपुरवा में एक प्लॉट दिखाया और 1.65 करोड़ रुपये में बेचने की बात कही। नोटिरियल एग्रीमेंट के बाद शोएब ने आरटीजीएस और नकद मिलाकर पूरी रकम दे दी। जब कई महीने गुजरने पर भी रजिस्ट्री नहीं हुई तो इरशाद ने अचानक कीमत दोगुनी कर दी। पैसे फंसे देख शोएब ने मजबूरी में दोबारा 1.65 करोड़ रुपये और दे दिए। कुल 3.30 करोड़ रुपये लेने के बावजूद इरशाद ने बैनामा नहीं किया।
जब पीड़ितों ने खुद जांच-पड़ताल की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ – जिस जमीन को बेचा जा रहा था, वह सरकारी अधिग्रहित भूमि थी, जिसका मालिकाना हक किसी और के पास था ही नहीं।
धमकी और रंगदारी की मांग जब शोएब ने अपना पैसा वापस मांगा तो 13 सितंबर को इरशाद आलम अपने साथी मोहम्मद उजैर हसन और कुछ अन्य लोगों के साथ उनकी बेकनगंज नई सड़क स्थित दुकान पर पहुंचे। वहां झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देते हुए 60 लाख रुपये रंगदारी मांगी गई। डर के मारे कारोबारी ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम एंड हेडक्वार्टर) विनोद कुमार सिंह से गुहार लगाई।
आदेश मिलते ही बेकनगंज पुलिस ने इरशाद आलम, मोहम्मद उजैर हसन और छह अज्ञात लोगों समेत कुल आठ के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467/468 (कूटरचना), 504/506 (अपराधिक धमकी) और 386 (रंगदारी) समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। डीसीपी सेंट्रल श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है।
पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी खुलाइरशाद आलम कोई पहली बार विवादों में नहीं हैं। उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई के अलावा कानपुर के जाजमऊ, चकेरी, बाबूपुरवा, बेकनगंज आदि थानों में एक दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी, जमीन हड़पने और अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं।
आरोपी का पक्ष समाचार मिलने पर इरशाद आलम ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, “मेरे खिलाफ जो मुकदमा दर्ज कराया गया है, वह पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद है। मैंने किसी तरह की धोखाधड़ी नहीं की। मामला कोर्ट में है और सच सामने आ जाएगा।”फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के दस्तावेज खंगाल रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है। एक फिल्मी शख्सियत से जुड़ा यह मामला कानपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है। देखना यह है कि ‘ताजमहल’ की तरह यह कहानी भी किसी ‘अन एटरनल’ मोड़ लेती है या कानून अपना काम करता है।






