देश का पहला ‘पंछी ड्रोन’ तैयार: IIT कानपुर ने बनाया ऐसा ऑटोनोमस ऑर्निथॉप्टर, जो दुश्मन को चकमा देकर लौट आएगा
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संवाद 24 संवाददाता। भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। IIT कानपुर ने देश का पहला पूरी तरह स्वचालित (ऑटोनोमस) फ्लैपिंग-विंग ड्रोन यानी ‘ऑर्निथॉप्टर’ विकसित किया है, जो असल पक्षी की तरह पंख फड़फड़ा कर उड़ता है। इसका सबसे बड़ा फायदा दुश्मन के रडार इसे पकड़ ही नहीं पाते, नजर आएगा तो सिर्फ एक पक्षी।यह ड्रोन न सिर्फ दिखने में पक्षी जैसा है, बल्कि उड़ान के दौरान बिल्कुल खामोश रहता है, बैटरी भी आम ड्रोनों से 4-5 गुना ज्यादा चलती है और सबसे खास बात अगर दुश्मन जीपीएस जाम कर दे या कंट्रोल सिग्नल पूरी तरह काट दे, तब भी यह अपना मिशन पूरा करके सुरक्षित घर लौट आएगा।
एक मोटर, बिना प्रोपेलर, 1 घंटे 20 मिनट तक उड़ान सामान्य क्वाडकॉप्टर ड्रोन में चार मोटर और प्रोपेलर होते हैं, जो तेज आवाज करते हैं और 15-20 मिनट में ही बैटरी खत्म हो जाती है। लेकिन IIT कानपुर का यह बर्ड ड्रोन सिर्फ एक मोटर से काम करता है। इसके पंख खुद लिफ्ट और थ्रस्ट दोनों पैदा करते हैं। नतीजा —बहुत कम बिजली खर्च लगभग न के बराबर आवाज 1 घंटा 20 मिनट तक लगातार उड़ान 1 किलोमीटर तक ऊंचाई और 300-400 मीटर की रेंज (बड़े मॉडल में और ज्यादा) दुश्मन जाम करे सिग्नल, फिर भी नहीं रुकेगा।
इस ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत इसका ऑटोनोमस सिस्टम है। प्रो. देवोपम दास (अनस्टेडी एयरोडायनैमिक्स एंड एयरक्राफ्ट डिजाइन लैब) के नेतृत्व में बनी टीम ने इसे GPS, IMU सेंसर और विजुअल नेविगेशन (कैमरा आधारित) का ऐसा कॉम्बिनेशन दिया है कि मिशन शुरू होने से पहले सारा डेटा ऑनबोर्ड कंप्यूटर में फीड कर दिया जाता है बीच में कनेक्शन टूट जाए तो भी कैमरे और सेव डेटा की मदद से खुद रास्ता ढूंढता रहेगामिशन पूरा होने पर अपने आप बेस पर लौट आएगा। रिसर्च स्टूडेंट श्रमन दास ने बताया, “युद्ध के समय दुश्मन सबसे पहले GPS और रेडियो सिग्नल जाम करता है। हमारा ड्रोन उस स्थिति में भी काम करता रहेगा। ”
दो साइज दोनों खतरनाक बड़ा मॉडल 1.6 मीटर विंगस्पैन, 800 ग्राम से 1 किलो तक पेलोड (लंबी दूरी की निगरानी, बॉर्डर सर्विलांस)माइक्रो मॉडल → सिर्फ 5 इंच का, 100-200 ग्राम पेलोड (गुप्त मिशन, अंदरूनी घुसपैठ, खुफिया जानकारी)दोनों में मेटल का इस्तेमाल न के बराबर है, इसलिए रडार इसे डिटेक्ट नहीं कर पाते।
भारतीय सेना ने मांगा पायलट प्रोजेक्ट ड्रोन की क्षमताएं देखते ही इंडियन आर्मी ने तुरंत रुचि दिखाई। पायलट प्रोजेक्ट तैयार हो चुका है और जल्द ही फील्ड ट्रायल शुरू होंगे। सेना के अधिकारी इसे “गेम चेंजर” बता रहे हैं क्योंकि? दुश्मन के इलाके में एक आम पक्षी की तरह घुस सकता है रडार से बचता है खामोशी से लंबे समय तक निगरानी करता है वापस लौटने की गारंटी पूरी तरह स्वदेशी, पूरी तरह घातक यह ड्रोन 100% मेड इन इंडिया है। डिजाइन से लेकर सॉफ्टवेयर तक सब कुछ IIT कानपुर के लैब में बना है। आने वाले समय में इसे और उन्नत बनाकर नाइट विजन, थर्मल इमेजिंग और छोटे हथियार ले जाने की क्षमता भी दी जा सकती है। IIT कानपुर के निदेशक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल ने कहा, “यह सिर्फ एक ड्रोन नहीं, भविष्य की हवा में लड़ने वाली भारतीय तकनीक का पहला कदम है।”






