चेकडैम घोटाला, अब कमिश्नर की TAC करेगी सच्चाई की परतें उघाड़ने का काम
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संवाद 24 संवाददाता। जल संरक्षण के नाम पर सरकारी खजाने की लूट और घटिया निर्माण का जो खेल लघु सिंचाई विभाग ने खेला था, उसकी अब उच्चस्तरीय जाँच होने जा रही है। कमिश्नर ने चार सदस्यीय तकनीकी सलाहकार समिति (TAC) गठित कर दी है जो मात्र 15 दिन में पूरी हकीकत सामने रखेगी।
यह वही चेकडैम हैं जिनमें मानक विहीन सामग्री डाली गई, काम आधा-अधूरा छोड़ दिया गया, फिर भी ठेकेदार को पूरा-पूरा भुगतान कर दिया गया।पहले चरण की जाँच में ही सब कुछ साफ हो चुका था। तत्कालीन डीएम ने पीडी डीआरडीए की अगुवाई में टीम बनाई थी, रिपोर्ट आई – सबकुछ गड़बड़। फिर मौजूदा डीएम कपिल सिंह ने भी दोबारा जाँच कराई, नतीजा वही।
अकबरपुर के सांसद देवेंद्र सिंह ‘भोले’ ने भी डीएम को पत्र लिखकर TAC जाँच की माँग की। आखिरकार डीएम ने संस्तुति की और कमिश्नर ने तुरंत एक्शन लिया।कमिश्नर ने अपर आयुक्त (वित्त) प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय TAC बनाई है।
टीम में शामिल हैं :पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार सिंह कन्नौज के डीडीओ नरेंद्र देव द्विवेदी निचली गंगा नहर खंड के अधिशासी अभियंता महेंद्र कुमार। इन लोगों को सभी पुरानी जाँचें, विभागीय पत्राचार, तकनीकी माप-जोख और वित्तीय रिकॉर्ड खंगालकर तथ्यात्मक रिपोर्ट देनी है। सिर्फ 15 दिन में।
खुद के कागजों में ही फँसे अफसर सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि खुद लघु सिंचाई विभाग के एक्सईएन ने 21 मार्च 2024 को रतनपुर, सुंदरपुर गजान, बड़ापुर निगोहिया समेत कई स्थलों का निरीक्षण किया और लिखित में रिपोर्ट दी काम अधोमानक और अधूरा है। लेकिन ठीक तीन दिन बाद, 24 मार्च को ठेकेदार के एक नकली-से पत्र का हवाला देकर कानपुर शहर के दो और देहात के एक जेई की टीम बनाई गई। 31 मार्च को एमबी कराकर पूरा पेमेंट ठेकेदार के खाते में डाल दिया गया। बाद में 7 मई को पीडी की जाँच में फिर वही बात सामने आई काम आज भी अधूरा है। कहा जाता है कि इस जाँच को भी मैनेज करने की कोशिश हुई थी।
ठेकेदार की कलई खुली, ब्लैकलिस्ट हुआ इटावा की फर्म मेसर्स शीलू कंस्ट्रक्शन को ये सारे काम मिले थे। डिलौलिया तालाब की जंजीरें खींची गईं तो पूरी पोल खुल गई। विभाग ने 4 दिसंबर 2025 को इस फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया और अगले तीन साल तक कोई सरकारी काम देने पर रोक लगा दी। अब सवाल यह है जो अफसर खुद लिखकर दे रहे थे कि काम अधूरा और घटिया है, वही तीन दिन में पलट कैसे गए?
एमबी में गलत माप-जोख कौन लिखवाया गया? पूरा भुगतान कराने की इतनी जल्दी क्यों थी? क्या सिर्फ ठेकेदार ही दोषी है या विभाग के अंदर भी कोई बड़ा खेल चल रहा था? कमिश्नर की TAC अब इन सारे सवालों का जवाब ढूंढ़ेगी। 15 दिन बाद जो रिपोर्ट आएगी, उसमें कई अफसरों की कुर्सी खतरे में दिख रही है। जनता का पैसा पानी की तरह बहाया गया, अब देखना यह है कि दोषियों पर कितना सख्त एक्शन होता है या फिर यह भी एक और “जाँच” बनकर फाइलों में दफ्न हो जाएगा। कानपुर देहात की जनता इंतजार कर रही है।इस बार सच सामने आए और दोषी बच न पाएँ।






