साकेत नगर पार्क भूमि विवाद: अब नगर निगम से भी मांगी जाएगी रिपोर्ट, जांच और गहरी
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संवाद 24 कानपुर। साकेत नगर में भूखंड संख्या 559 की जमीन को लेकर जारी विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पार्क की जमीन को स्कूल चलाने के लिए आवंटित किए जाने के मामले में शासन स्तर पर गठित कमेटी ने अब नगर निगम से भी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इससे पहले केडीए (कानपुर विकास प्राधिकरण) अपनी रिपोर्ट कमेटी को सौंप चुका है।
चीफ इंजीनियर ने किया था आवंटन, बाद में हत्या हो गई केडीए ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 1998 में डॉ. बृज किशोरी दुबे मेमोरियल स्कूल के नाम पार्क की जमीन तत्कालीन चीफ इंजीनियर द्वारा आवंटित की गई थी। हैरानी की बात यह है कि बाद में उसी चीफ इंजीनियर की किसी अन्य मामले में केडीए गेट के सामने हत्या हो गई थी। कमेटी ने गंभीरता से यह सवाल उठाया है कि ऐसी संवेदनशील फाइल आखिर गायब कैसे हो गई? क्या आवंटन में सिर्फ एक ही अधिकारी की भूमिका थी या फाइल अन्य अफसरों से भी होकर गुज़री? कमेटी का मानना है कि इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए अभी और गहन जांच जरूरी है।
नगर निगम ने पहले कहा आवंटन किया, फिर पलट गया – जांच में यह भी सामने आया है कि नगर निगम से संबंधित एक पुराना पत्र मिला था, जिसमें पार्क के आवंटन का जिक्र था। लेकिन बाद में नगर निगम ने साफ कहा कि उसने कोई आवंटन नहीं किया, जिससे मामला और उलझ गया। नगर निगम द्वारा कुछ निर्माण कार्य पहले किए जाने के कारण पार्क की जमीन का हिस्सा भी कम हो गया। अब कमेटी ने उसी मुद्दे पर स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है। आवास सचिव बलकार सिंह ने इस दिशा में निर्देश जारी किए हैं।
स्कूल प्रबंधन बोला अभी ढहाने का कोई आदेश नहीं – साकेत नगर स्थित पार्क की जमीन पर बने डॉ. बृज किशोरी दुबे मेमोरियल स्कूल के प्रबंधक बृजेश दुबे ने भी अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है जांच अभी पूरी नहीं हुई है। कमेटी ने स्कूल ढहाने का कोई निर्णय नहीं लिया है।अफवाहों या भ्रम से बचने के लिए यह बात अभिभावकों और विद्यार्थियों तक पहुंचाना ज़रूरी है। स्कूल प्रबंधन ने यह भी सवाल उठाया है कि दस साल के लिए किए गए इस आवंटन में क्या सिर्फ एक चीफ इंजीनियर ही दोषी हो सकते हैं?
क्या फाइल अन्य अधिकारियों की निगरानी या हस्ताक्षर के बिना आगे बढ़ सकती है? उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया पर नए सिरे से शोध होना चाहिए। केडीए की दलीलें कमेटी को संतुष्ट नहीं कर सकीं कमेटी ने केडीए से मिली रिपोर्ट पर असंतोष जताया है। फाइल के गायब होने, आवंटन की प्रक्रिया, नगर निगम की उलझी हुई भूमिका और जमीन के वास्तविक उपयोग जैसे कई बिंदु अभी स्पष्ट नहीं हैं।
जांच आगे कहाँ पहुँचेगी? नगर निगम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास था? आवंटन प्रक्रिया कानूनी थी या नहीं? स्कूल का भविष्य क्या होगा? और क्या किसी अधिकारी की बड़ी लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है?






