स्टंटबाजी का विरोध पड़ा भारी नशे में ऑटो चालक का ब्लेड से हमला, पांच घायल

संवाद 24 संवाददाता। कानपुर की सड़कों पर बढ़ती अराजकता ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किदवई नगर में स्टंटबाजी का विरोध करने पर नशे में धुत ऑटो चालक और उसके साथियों ने मां-बेटी समेत पांच लोगों पर ब्लेड से हमला कर दिया। हैरानी की बात यह है कि घटना जूही थाने के सामने हुई, फिर भी पीड़ितों को तत्काल मदद नहीं मिल सकी।

स्टंट से शुरू हुआ विवाद, हमले में बदला
एन ब्लॉक कच्ची बस्ती निवासी रानी के अनुसार, गुरुवार शाम वह अपनी बेटी पलक, बहनों राधा और प्रीति व बहनोई गौरव के साथ बाजार जा रही थीं। जूही थाने के सामने गली से मुख्य मार्ग पर निकलते समय विपरीत दिशा से स्टंट करते हुए आ रहे ऑटो से वे बाल-बाल बचीं।
कुछ ही दूरी पर ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया। विरोध जताने पर चालक आदिल, उसके साथी दिशांत और अन्य युवकों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोप है कि सभी शराब के नशे में थे। विरोध करने पर मारपीट शुरू हुई और बीचबचाव में ब्लेड से हमला कर दिया गया।
रानी के गाल पर गहरा जख्म आया, जिसमें 25 टांके लगे। प्रीति को 10 टांके आए, पलक की कलाई घायल हुई और राधा की उंगलियों में काट लिया गया।

पुलिस की भूमिका पर सवाल
पीड़ित परिवार का आरोप है कि यूपी-112 पर कॉल करने के एक घंटे बाद पुलिस पहुंची, तब तक आरोपी ऑटो लेकर फरार हो चुके थे। जूही थाना पुलिस पर भी मदद न करने का आरोप लगाया गया है, हालांकि थाना प्रभारी केके पटेल ने इन आरोपों को निराधार बताया।

किदवई नगर थाना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार राम ने बताया कि आदिल और दिशांत समेत 12 लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मुख्य आरोपी आदिल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

बढ़ती अराजकता पर नहीं लग रहा अंकुश
बारादेवी चौराहे और आसपास के इलाकों में ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी आम बात हो गई है। बीच सड़क सवारियां भरना, मनमाने ढंग से वाहन रोकना और ट्रैफिक नियमों की खुलेआम अनदेखी करना रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी रहता है।

जरूरत सख्त कार्रवाई की
यह घटना केवल एक परिवार पर हमला नहीं, बल्कि शहर में बढ़ती सड़क अराजकता की चेतावनी है। सार्वजनिक परिवहन चालकों की जवाबदेही तय करने, नशे में वाहन चलाने पर कड़ी कार्रवाई और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना अब समय की मांग है।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सड़कों पर स्टंटबाजी और गुंडागर्दी आम लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

Samvad 24 Desk
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