पेंशन की टेंशन आयकरदाता बताकर रोकी गई विधवा पेंशन, हलफनामों से खुल रही गरीबी की हकीकत
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संवाद 24 संवाददाता। सरकारी रिकॉर्ड में आयकरदाता घोषित किए जाने के बाद जिले की 1818 विधवा महिलाओं की पेंशन रुकने का खतरा पैदा हो गया है। हकीकत यह है कि इनमें से अधिकांश महिलाएं बेहद गरीब हैं और जीवन यापन के लिए पूरी तरह विधवा पेंशन पर निर्भर हैं। नोटिस मिलने के बाद महिलाएं अब गरीबी का हलफनामा, कच्चे मकानों और झोपड़ियों की तस्वीरें देकर अपनी सच्चाई साबित करने को मजबूर हैं।
जिला प्रोबेशन विभाग को दिसंबर में शासन से सूची मिली थी, जिसमें 1818 विधवाओं को आयकरदाता बताया गया। इसके बाद इनकी पेंशन रोकने की प्रक्रिया शुरू हुई। नोटिस मिलते ही महिलाओं में हड़कंप मच गया और वे विभाग के चक्कर लगाने लगीं।
मामलों ने खोली सिस्टम की खामी
सनिगवां के गायत्रीनगर निवासी विक्रमता बाजपेई ने हलफनामे में बताया कि उनके पति सुनील कुमार की 2018 में मृत्यु हो चुकी है। दो लाख रुपये से भी कम वार्षिक आय में परिवार का खर्च चल रहा है। उन्होंने कभी आयकर रिटर्न नहीं भरा और जांच के लिए तैयार हैं।
दहेली सुजानपुर की कमलेश देवी के पति राम शंकर का निधन 2008 में हुआ था। वह वर्षों से विधवा पेंशन पर गुजर-बसर कर रही हैं। उनकी सालाना आय एक लाख रुपये से भी कम है और आज तक उन्होंने पैन कार्ड तक नहीं बनवाया।
घर-घर हो रहा सत्यापन
जिले में करीब 68 हजार विधवा पेंशन लाभार्थी हैं। सरकार उन्हें एक हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता देती है, जो हर तिमाही खाते में भेजी जाती है। बीते एक साल से योजना को फैमिली आईडी और केवाईसी से जोड़ा जा रहा है। इसी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में महिलाओं को गलती से आयकरदाता मान लिया गया। अब बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन ने राहत भरा कदम उठाया है। एसडीएम और बीडीओ घर-घर जाकर जमीनी सत्यापन कर रहे हैं। अब तक 50 से अधिक महिलाएं गरीबी का हलफनामा जमा कर चुकी हैं।
अधिकारियों का आश्वासन
जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने कहा,
सभी महिलाओं को नोटिस भेजा गया है। उनसे हलफनामा लिया जा रहा है और सत्यापन कराया जा रहा है। जो महिलाएं वास्तविक रूप से गरीब पाई जाएंगी, उनकी पेंशन नहीं रोकी जाएगी।
फिलहाल प्रशासन की जांच से इन महिलाओं को उम्मीद बंधी है कि कागज़ी गलती की सज़ा उन्हें नहीं मिलेगी और उनकी पेंशन सुरक्षित रहेगी।






