90 किलोमीटर की खामोशी जो थैंक यू योगी जी में बदल गई
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संवाद 24 संवाददाता। कभी जिन कानों में सन्नाटा था, आज वहां आवाज़ें गूंज रही हैं। जिन होंठों पर शब्द नहीं थे, आज वहीं से कृतज्ञता फूट पड़ी थैंक यू योगी जी। यह कहानी है उस नन्ही बच्ची खुशी की, जिसने अपनी खामोशी तोड़ने के लिए 90 किलोमीटर का पैदल सफर तय किया और आखिरकार उसकी दुनिया ही बदल गई।
खुशी जन्म से ही सुनने और बोलने में असमर्थ थी। शब्दों के बिना उसकी दुनिया इशारों तक सीमित थी, लेकिन मन में एक ही चाह थी—मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी बात कहना। इसी जिद और भरोसे के साथ नवंबर 2025 में वह बिना बताए घर से निकल पड़ी और 90 किलोमीटर पैदल चलकर लखनऊ पहुंच गई।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर रोती हुई बच्ची को पुलिस ने सुरक्षित थाने पहुंचाया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया। जांच में स्पष्ट हुआ कि खुशी को सुनने के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट की आवश्यकता है—एक ऐसा इलाज, जिसकी लागत छह से सात लाख रुपये तक थी, जो उसके परिवार के लिए असंभव थी।
यहीं से सरकार की संवेदनशीलता ने कहानी का रुख बदल दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर समाज कल्याण विभाग, दिव्यांगजन अधिकारी और एक फाउंडेशन के सहयोग से इलाज की पूरी व्यवस्था की गई।
26 जनवरी 2026 को खुशी का कॉक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन किया गया और यह पूरी तरह सफल रहा।
ऑपरेशन के बाद खुशी की दुनिया में पहली बार आवाजें उतरीं। आज वह न केवल सुन पा रही है, बल्कि टूटे-फूटे शब्दों में बोलने की शुरुआत भी कर चुकी है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान उसके मुंह से निकले पहले शब्द—“थैंक यू योगी जी सिर्फ दो शब्द नहीं थे, बल्कि 90 किलोमीटर की पीड़ा, उम्मीद और संघर्ष की गूंज थे।
डॉक्टरों के अनुसार नियमित स्पीच थैरेपी से अगले तीन महीनों में उसकी बोलने की क्षमता काफी बेहतर हो जाएगी और एक साल के भीतर वह सामान्य बच्चों की तरह बातचीत करने लगेगी। खुशी की कहानी सिर्फ एक इलाज की सफलता नहीं है, यह इस बात का प्रमाण है कि जब शासन, संवेदना और संकल्प एक साथ चलते हैं, तो खामोश ज़िंदगियों में भी आवाज़ लौट आती है।
यह कहानी बताती है कि सरकारें जब दिल से काम करें, तो एक बच्ची का भविष्य ही नहीं, पूरी दुनिया बदल सकती है।






