मजबूत कानून व्यवस्था की पहचान, डीसीपी साउथ और सेंट्रल को राष्ट्रपति पुलिस पदक
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संवाद 24 संवाददाता। किसी भी शहर की पहचान उसकी सड़कों, इमारतों या बाजारों से नहीं, बल्कि वहां नागरिकों को मिलने वाले सुरक्षा के भरोसे से होती है। कानपुर में बीते कुछ वर्षों में कानून व्यवस्था को लेकर जो सकारात्मक बदलाव दिखाई दिए हैं, उनकी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इसी कड़ी में गणतंत्र दिवस के अवसर पर डीसीपी साउथ और डीसीपी सेंट्रल को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जाना न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरी कानपुर पुलिस कमिश्नरी के लिए गर्व का विषय है।
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने अपने कार्यकाल में अपराध और माफिया नेटवर्क के खिलाफ जिस सख्ती और रणनीतिक सूझबूझ के साथ कार्रवाई की, उसने दक्षिण जोन की तस्वीर ही बदल दी। भूमाफियाओं पर शिकंजा कसना हो या संगठित अपराधियों को जेल भेजना—उनकी अगुवाई में चलाए गए अभियानों ने साफ संदेश दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं। अधिवक्ता अखिलेश दुबे के नेटवर्क का पर्दाफाश और दुष्कर्म के झूठे मुकदमों के गिरोह को बेनकाब करना उनकी कार्यशैली की बड़ी मिसाल है।
‘ऑपरेशन महाकाल’ के तहत माफिया दीनू उपाध्याय के गुर्गों पर कार्रवाई ने अपराध जगत में खलबली मचा दी।
वहीं डीसीपी सेंट्रल आईपीएस अतुल श्रीवास्तव ने कम समय में ही अपनी मजबूत पहचान बना ली। डीसीपी क्राइम के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने ज्वैलरी फर्म से जुड़ी बड़ी धोखाधड़ी, सिंहानिया समूह के कर्मचारी से ठगी और अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों के गिरोह पर निर्णायक कार्रवाई कर यह साबित किया कि अपराध चाहे स्थानीय हो या सीमाओं के पार कानून का हाथ हर जगह पहुंच सकता है। कंबोडिया से संचालित साइबर ठगी नेटवर्क पर शिकंजा कसना उनके नेतृत्व की दूरदर्शिता को दर्शाता है।
इस सम्मान की खास बात यह भी है कि यह केवल शीर्ष अधिकारियों तक सीमित नहीं रहा। कमिश्नरी के पांच पुलिसकर्मियों को महाकुंभ सेवा मेडल व प्रशस्ति पत्र और 19 पुलिसकर्मियों को गोल्ड व सिल्वर प्रशंसा चिह्न देकर यह संदेश दिया गया है कि पुलिस व्यवस्था की असली ताकत हर स्तर पर ईमानदारी से काम करने वाले कर्मियों में होती हैचाहे वह इंस्पेक्टर हों, दरोगा हों या सिपाही।
कानपुर पुलिस को मिला यह सम्मान दरअसल उस मेहनत, जोखिम और समर्पण की सार्वजनिक स्वीकृति है, जो अक्सर वर्दी के पीछे छिपी रह जाती है। यह उपलब्धि न केवल पुलिस बल का मनोबल बढ़ाएगी, बल्कि आम नागरिकों में भी यह भरोसा मजबूत करेगी कि कानून व्यवस्था सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक जीवंत संकल्प है।
गणतंत्र दिवस पर मिला यह सम्मान कानपुर के लिए एक संदेश है—
जब प्रशासन दृढ़ हो, नेतृत्व ईमानदार हो और नीयत साफ हो, तो कोई भी शहर सुरक्षित और सशक्त बन सकता है।






