30 करोड़ की बेनामी संपत्तियों पर आयकर की बड़ी कार्रवाई, कानपुर के अफसर उद्यमी भी रडार पर
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संवाद 24 संवाददाता। काले धन और बेनामी संपत्तियों के खिलाफ आयकर विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी कार्रवाई करते हुए पिछले छह महीनों में करीब 30 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त कर ली हैं। अब इन संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस अभियान की आंच कानपुर तक पहुंच चुकी है, जहां कई सरकारी अधिकारी और प्रभावशाली उद्यमी आयकर विभाग के रडार पर बताए जा रहे हैं।
आयकर विभाग के बेनामी प्रकोष्ठ ने यह कार्रवाई जुलाई से दिसंबर 2025 के बीच मेरठ, झांसी, सहारनपुर, नोएडा और इटावा जैसे शहरों में की है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह अब तक की सबसे व्यापक और प्रभावी कार्रवाई मानी जा रही है।
इटावा में 16 करोड़ की संपत्ति जब्त, सबसे बड़ी कार्रवाई
इस अभियान की सबसे बड़ी कार्रवाई इटावा के जसवंतनगर में सामने आई, जहां 16 करोड़ रुपये की एक भव्य संपत्ति को बेनामी घोषित कर जब्त किया गया। यह संपत्ति नोएडा विकास प्राधिकरण में ओएसडी रह चुके रविंद्र यादव से जुड़ी बताई गई है, जिनके खिलाफ पहले से आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है।
जांच में सामने आया कि जसवंतनगर में बना पांच मंजिला स्कूल होटलनुमा सुविधाओं से लैस है और इसका निर्माण काले धन से किया गया। जमीन ओएसडी की पत्नी सुमन यादव के नाम पर दर्ज थी, जबकि निर्माण के लिए बनाई गई ट्रस्ट के खातों में करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन पाया गया।
दोस्तों और कर्मचारियों के नाम पर संपत्ति छिपाने का खेल
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि स्कूल निर्माण के लिए बनाई गई आरएस एजुकेशन सोसाइटी के खातों में 2015 से 2017 के बीच भारी रकम जमा कराई गई। यह राशि ओएसडी के करीबी दोस्तों द्वारा लगाई गई थी, लेकिन वे आय का वैध स्रोत नहीं बता सके।
इसी तरह सहारनपुर में 1.68 करोड़ रुपये की संपत्ति को कर्मचारियों के नाम पर बांटकर छिपाया गया था। आयकर छापे के दौरान मिले दस्तावेजों से इस पूरे खेल का खुलासा हुआ। कर्मचारियों ने बयान में कहा कि उन्हें अपने नाम दर्ज संपत्ति की जानकारी तक नहीं थी।
झांसी में एक दिन में करोड़ों का लेनदेन
झांसी में 1.24 करोड़ रुपये की जमीन का मामला भी चौंकाने वाला है। जांच में सामने आया कि एससी-एसटी समुदाय के लोगों से जमीन खरीदने के नाम पर पहले खातों में बड़ी रकम डाली गई और फिर उसी दिन निकाल ली गई। पोस्ट-डेटेड चेक दिए गए, जो कभी क्लियर ही नहीं हुए। इस तरह की फर्जी लेनदेन श्रृंखला ने आयकर विभाग को कार्रवाई के लिए मजबूर किया।
कानपुर में भी बढ़ी हलचल
आयकर विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि कानपुर में भी कई अधिकारी और बड़े कारोबारी जांच के घेरे में हैं। संदिग्ध संपत्तियों, ट्रस्टों और रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई जमीनों की पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में यहां भी बड़ी कार्रवाई की संभावना से इन वर्गों में खलबली मची हुई है।
2016 से सक्रिय है बेनामी प्रकोष्ठ
आयकर विभाग में बेनामी प्रकोष्ठ का गठन वर्ष 2016 में किया गया था। तब से अब तक हजारों करोड़ की बेनामी संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है। विभाग का साफ कहना है कि काले धन के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।






