कटिया से चलती ‘तीसरी आंख’ हुई अंधी 149 चौराहों के सीसीटीवी बंद, सुरक्षा पर सवाल
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर की निगरानी व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। शहर के 497 प्रमुख चौराहों और तिराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में से 149 स्थानों के कैमरे बंद हो गए हैं। वजह—इन कैमरों को अवैध बिजली कनेक्शन यानी कटिया से चलाया जा रहा था, जिसे केस्को ने अभियान चलाकर काट दिया। नतीजा यह कि अपराध नियंत्रण और ट्रैफिक मैनेजमेंट में अहम भूमिका निभाने वाली ‘तीसरी आंख’ फिलहाल अंधी हो गई है।
ऑपरेशन त्रिनेत्र पर असर
कमिश्नरी पुलिस ने बीते दो वर्षों में ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और तिराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। सामाजिक संस्थाओं, कंपनियों और प्रतिष्ठानों के सहयोग से लगे इन कैमरों ने अब तक 1241 मामलों—गुमशुदगी, चोरी, लूट, हत्या और छिनैती—के खुलासे में मदद की है। ट्रैफिक नियंत्रण में भी इनकी अहम भूमिका रही है।
लेकिन हकीकत यह है कि इन कैमरों को स्ट्रीट लाइट से कटिया डालकर बिजली दी जा रही थी। दिसंबर के आखिरी सप्ताह और नए साल की शुरुआत में केस्को के अभियान के दौरान यह अवैध व्यवस्था सामने आई और 149 स्थानों की सप्लाई काट दी गई।
जांच में खुला राज, नगर निगम से मांगी मदद
नए साल में जब पुलिस, क्राइम ब्रांच और ट्रैफिक पुलिस ने कैमरों की नियमित जांच की, तो कई जगह कनेक्शन कटे मिले। उच्च अधिकारियों को जानकारी दी गई, जिसके बाद नगर निगम के सहयोग से वैध बिजली कनेक्शन जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) आशुतोष कुमार के अनुसार, नगर निगम को पत्र भेजा गया है और जल्द ही कनेक्शन बहाल होने की उम्मीद है।
स्मार्ट सिटी के कैमरे भी प्रभावित
नगर निगम के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से जुड़े स्मार्ट सिटी के 160 स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरे अलग व्यवस्था के तहत संचालित होते हैं और 24 घंटे ऑनलाइन रहते हैं। हालांकि मेट्रो निर्माण और अन्य कारणों से इनमें से 11 स्थानों के कैमरे फिलहाल बंद हैं। ये कैमरे ऑपरेशन त्रिनेत्र के कैमरों से अलग हैं।
आंकड़ों में निगरानी तंत्र
ऑपरेशन त्रिनेत्र: 1800 सीसीटीवी कैमरे
ऑपरेशन घर-घर: 1.20 लाख सीसीटीवी कैमरे
स्मार्ट सिटी: 160 स्थानों पर कैमरे, जिनमें 11 बंद
नोडल अधिकारी एसीपी चित्रांशु गौतम के मुताबिक, स्मार्ट सिटी के अंतर्गत 497 जगहों के कैमरों को भी जल्द ऑनलाइन किया जा रहा है।
जिम्मेदारी किसकी
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पुलिस सुरक्षा के लिए कैमरों पर निर्भर है, दूसरी ओर वैध बिजली कनेक्शन की व्यवस्था समय रहते नहीं की गई। केस्को एमडी सैमुअल पॉल एन का कहना है कि सीसीटीवी कैमरों पर अधिक लोड नहीं होता और कनेक्शन कटने की जानकारी नहीं थी; नगर निगम से तथ्य जुटाए जाएंगे।
निष्कर्ष
शहर की सुरक्षा व्यवस्था तकनीक पर टिकी है, लेकिन तकनीक तभी कारगर होती है जब बुनियादी व्यवस्थाएं दुरुस्त हों। कटिया से चलती ‘तीसरी आंख’ ने यह साफ कर दिया कि अवैध जुगाड़ से सुरक्षा नहीं, बल्कि खतरे बढ़ते हैं। अब जरूरत है कि पुलिस, नगर निगम और बिजली विभाग मिलकर स्थायी और वैध समाधान करें, ताकि कानपुर की निगहबानी फिर से पूरी ताकत के साथ शुरू हो सके।






