कानपुर कपड़ा कमेटी के शताब्दी समारोह के खर्च पर उठे गंभीर सवाल
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संवाद 24 संवाददाता। वित्तीय अनियमितताओं को लेकर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी), कानपुर की ओर से नोटिस जारी होने के बाद कानपुर कपड़ा कमेटी में विवाद गहराता जा रहा है। तीन साल पहले आयोजित हुए कमेटी के शताब्दी समारोह के खर्च अब जांच के घेरे में हैं। समारोह के नाम पर किए गए खर्चों में नियमों की अनदेखी और अनावश्यक भुगतान के आरोप सामने आए हैं।
सबसे बड़ा सवाल उस खर्च को लेकर है, जो पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के स्वागत और सुरक्षा के नाम पर दिखाया गया, जबकि वे कार्यक्रम में आए ही नहीं। दस्तावेजों के अनुसार, बाजार में स्वागत द्वार लगाने पर 30 हजार रुपये खर्च दर्शाया गया, जबकि कार्यक्रम मर्चेंट चैंबर सभागार में आयोजित हुआ था।
सुरक्षा और बाउंसर के खर्च पर भी सवाल
खर्च विवरण में पूर्व राष्ट्रपति की सुरक्षा पर 40 हजार रुपये और बाउंसर पर 15 हजार रुपये खर्च दिखाया गया है। जानकारों के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति को शासन और जिला प्रशासन की ओर से पहले से ही पूरी सुरक्षा मिलती है, ऐसे में अलग से यह खर्च क्यों और कैसे किया गया—यह बड़ा प्रश्न है।
इसके अलावा 35 हजार रुपये का डीजल खर्च, दिल्ली जाने पर हजारों रुपये का यात्रा व्यय, और मुख्य अतिथि को आमंत्रित करने के लिए गिफ्ट, मिठाई व अन्य मदों में 31,390, 4,000 और 2,300 रुपये खर्च दिखाया गया है।
दुपट्टा, झंडे और प्रिंटिंग में लाखों
खर्च सूची में 40,598 रुपये दुपट्टों पर खर्च दिखाया गया, जिसमें से 32 हजार रुपये केवल प्रिंटिंग के बताए गए हैं। वहीं, 13 हजार रुपये के झंडे बाजार में लगवाने का भी उल्लेख है। इन सभी खर्चों की न तो समय पर जानकारी कमेटी को दी गई और न ही आवश्यक कोटेशन मंगवाए गए।
नियमों की अनदेखी के आरोप
कमेटी के निदेशक और सागरी ग्रुप के संचालक रुमित सिंह सागरी ने आरोप लगाया कि समारोह के नाम पर लाखों रुपये की गड़बड़ी की गई। उन्होंने बताया कि कपड़ा कमेटी आरओसी में धारा 8 (नो प्रॉफिट–नो लॉस) के तहत पंजीकृत है। इसके बावजूद पांच लाख रुपये का दान लेना और बाद में वापस करना दिखाया गया, जो नियमों के विरुद्ध है।
नियम यह भी है कि 5,000 रुपये से अधिक के नकद खर्च पर कमेटी की मंजूरी जरूरी होती है, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। हैरानी की बात यह है कि जून 2023 में हुए शताब्दी समारोह का पूरा खर्च विवरण दिसंबर 2023 तक भी प्रस्तुत नहीं किया गया।
कोषाध्यक्ष का इस्तीफा और आंतरिक विवाद
खर्च को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि तत्कालीन कोषाध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कई काम बिना कोटेशन के कराए गए। इसके बाद भी पूर्व पदाधिकारियों की एक बैठक हुई, जिसमें इस्तीफा दे चुके कोषाध्यक्ष को तो बुलाया गया, लेकिन वरिष्ठ उपाध्यक्ष रुमित सिंह सागरी, निदेशक वीरेंद्र गुलाटी और राकेश कपूर को आमंत्रित नहीं किया गया।
आरोप है कि केवल पांच लोगों ने 30 लाख रुपये के आय-व्यय को बिना सदन में पास कराए भुगतान कर दिया। इसके अलावा छह महीने के ऑफिस खर्च को लेकर भी अलग विवाद सामने आया।
चुनाव रद्द करने की मांग
मामला अब चुनाव तक पहुंच गया है। कपड़ा कमेटी के पूर्व प्रधान सचिव नवीन निवेटिया के भाई ज्योति निवेटिया ने चुनाव बोर्ड को पत्र भेजकर हाल ही में हुए चुनाव रद्द करने की मांग की है। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस पर मुख्य चुनाव अधिकारी सत्यनारायण सिंहानिया का कहना है कि उन्हें ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है और जब सभी सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं, तो चुनाव रद्द करने का सवाल ही नहीं उठता।
कुल मिलाकर, शताब्दी समारोह के खर्च ने कानपुर कपड़ा कमेटी को वित्तीय पारदर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र के सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि आरओसी की जांच और आगे की कार्रवाई इस विवाद को किस दिशा में ले जाती






