सब्जी न होने पर भड़का नशा, मां-बेटे पर बांके से 33 वार…पति गिरफ्तार
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर के घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के सरदेपुर गांव में रविवार रात एक दिल दहला देने वाला दोहरा हत्याकांड सामने आया। मामूली घरेलू विवाद—घर में सब्जी न होने की शिकायत—ने ऐसा भयावह रूप लिया कि नशे में धुत पति ने अपनी पांच माह की गर्भवती पत्नी और ढाई साल के मासूम बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस हत्याकांड की क्रूरता को और उजागर कर दिया है।
पोस्टमार्टम में सामने आई हैवानियत
सोमवार को वीडियोग्राफी के साथ कराए गए पोस्टमार्टम में डॉक्टरों ने खुलासा किया कि महिला के सिर और गर्दन पर बांके से 19 वार, जबकि मासूम बेटे के शरीर पर 14 वार किए गए थे। दोनों के सिर और गर्दन में चार अंगुल तक गहरे घाव पाए गए। सिर की हड्डियां टूटने, अत्यधिक रक्तस्राव और कोमा में चले जाने से मौत की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक वार इतने निर्मम थे कि बचने की कोई संभावना नहीं थी।
नशे की लत और घरेलू हिंसा की पृष्ठभूमि
मृतका रूबी देवी के पिता मनोज कुमार (निवासी: गौरा चिरियारा, थाना हुसैनगंज, फतेहपुर) ने बताया कि रूबी की शादी वर्ष 2021 में अखिलेश सिंह उर्फ सुरेंद्र यादव उर्फ स्वामी से हुई थी। सुरेंद्र ट्रक में खलासी था और धीरे-धीरे शराब का आदी हो गया। कमाई का बड़ा हिस्सा नशे में उड़ा देता था। दो साल पहले उसने रूबी के साथ मारपीट भी की थी, लेकिन सामाजिक बदनामी के डर से परिवार ने तब पुलिस में शिकायत नहीं की।
घटना की रात क्या हुआ
रविवार रात सुरेंद्र नशे में घर पहुंचा और सब्जी न होने को लेकर विवाद शुरू हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि उसने घर में रखे बांके से पत्नी रूबी और मासूम बेटे लावांश पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। शोर सुनकर आसपास के लोग पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों की जान जा चुकी थी।
आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजा गया
घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। पुलिस ने उसे रेलवे ट्रैक के पास से गिरफ्तार कर लिया। रूबी के भाई दिलीप (निवासी: फतेहपुर) की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है। कोर्ट के आदेश पर आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
डीसीपी दक्षिण दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले में सभी साक्ष्यों को संकलित कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मातम में डूबा परिवार
हत्याकांड के बाद रूबी की मां दुर्गा देवी और भाई दिलीप का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में सन्नाटा पसरा है और हर कोई इस बात से स्तब्ध है कि नशे और घरेलू कलह ने एक पूरा परिवार उजाड़ दिया।
यह वारदात न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि समाज के सामने भी गंभीर सवाल खड़े करती है—क्या नशे की लत और घरेलू हिंसा को समय रहते गंभीरता से लिया जाता, तो दो मासूम जानें बच सकती थीं?






