तमंचे के साए में लूट, खेत में रह रहे वृद्ध किसान को बनाया बंधक, चार भैंसें ले उड़े बदमाश
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र के तिवारीपुर गांव में बीती रात हुई वारदात ने ग्रामीण इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेतों में रहकर पशुपालन के सहारे जीवन यापन कर रहे एक वृद्ध किसान को तमंचे के बल पर बंधक बनाकर बदमाशों ने चार भैंसें लूट लीं। यह घटना न सिर्फ अपराधियों की बेखौफ मानसिकता को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संगठित पशु चोरी किस कदर हिंसक रूप लेती जा रही है।
मफलर से बांधकर चारपाई पर जकड़ा
पीड़ित किसान शिवनारायण उर्फ बाबा रोज की तरह अपने खेत पर ही पशुओं के साथ रात बिता रहे थे। देर रात चार से पांच अज्ञात बदमाश खेत में घुसे, तमंचा दिखाकर उन्हें आतंकित किया और उनके ही मफलर से हाथ-पैर बांधकर चारपाई पर पटक दिया। विरोध करने पर मारपीट की गई, ताकि डर का माहौल बना रहे। इसके बाद बदमाश एक-एक कर चारों भैंसें खोलकर जंगल की ओर ले जाने लगे।
शोर मचते ही बदमाश भागे
करीब दो सौ मीटर दूर जाते समय किसी तरह किसान ने शोर मचा दिया। आवाज सुनकर पास ही पानी की टंकी पर चौकीदारी कर रहे उनके भाई मंगल मौके पर पहुंचे और उन्हें खोलकर गांव में हड़कंप मचा दिया। ग्रामीणों के इकट्ठा होते ही बदमाश घबरा गए और दो भैंसों को लेकर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
जंगल से मिलीं दो भैंसें, दो अब भी गायब
सूचना मिलते ही डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंची और रातभर तलाश की, लेकिन तत्काल कोई सुराग हाथ नहीं लगा। करीब तीन घंटे बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के जंगल में खोजबीन की, जहां दो भैंसें पैरों से बंधी हालत में मिल गईं। हालांकि, शेष दो भैंसों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है, जिससे किसान और उसका परिवार गहरे सदमे में है।
पहले से रची गई साजिश के संकेत
किसान ने पुलिस को बताया कि घटना से एक दिन पहले पास के गांव सुनहैला के दो युवक उनके पास आए थे और बहाने से जबरन शराब पिलाने की कोशिश कर रहे थे। पीड़ित का दावा है कि वही युवक रात में बदमाशों के साथ दिखाई दिए। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों संदिग्धों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस जांच जारी, तहरीर के आधार पर कार्रवाई
महाराजपुर थाना प्रभारी राजेश कुमार के अनुसार, पीड़ित की पहचान पर दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। तहरीर मिलने और जांच पूरी होने के बाद मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीण सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह घटना बताती है कि पशु चोरी अब सिर्फ चोरी नहीं रही, बल्कि हिंसक अपराध का रूप ले चुकी है। खेतों में अकेले रहने वाले बुजुर्ग किसानों की सुरक्षा, रात की गश्त और पशु तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई ये सभी मुद्दे एक बार फिर प्रशासन के सामने खड़े हैं। तिवारीपुर की यह वारदात चेतावनी है कि अगर समय रहते सख्ती नहीं हुई, तो ग्रामीण अंचल अपराधियों के लिए आसान निशाना






