विभागीय दबाव में लटकी विवेचना पीड़ित का आरोप न्याय के लिए CM तक जाऊंगा
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर के चकेरी थाने से जुड़ा यह मामला सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र की निष्पक्षता पर उठते सवालों की गंभीर तस्वीर पेश करता है। तत्कालीन थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी समेत अन्य के खिलाफ डकैती व मारपीट जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई न होना पीड़ित परिवार की पीड़ा को और गहरा कर रहा है। पीड़ित का आरोप है कि चूंकि मामला विभागीय है, इसलिए पुलिस विवेचना में जानबूझकर लेटलतीफी बरत रही है।
क्या वर्दी कानून से ऊपर है?
लाल बंगला के चंद्र नगर निवासी संजय जायसवाल और उनकी पत्नी संगीता जायसवाल का आरोप है कि 29 मार्च को जमीन विवाद के दौरान बिना किसी कोर्ट या सक्षम अधिकारी के आदेश के जबरन कब्जा कराया गया। इस कार्रवाई में तत्कालीन चकेरी थाना प्रभारी संतोष कुमार शुक्ला, तत्कालीन सनिगवां चौकी प्रभारी अंकित खटाना, एक बिल्डर और करीब 40 अज्ञात लोगों की भूमिका बताई गई। आरोप है कि पुलिसिया संरक्षण में यह सब हुआ और विरोध करने पर संजय जायसवाल को जेल तक भेज दिया गया।
हाईकोर्ट के आदेश पर FIR, फिर भी ठहराव
पीड़िता ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य के खिलाफ मारपीट, डकैती समेत कई गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बावजूद महीनों बीतने के बाद भी विवेचना की रफ्तार पर सवाल खड़े हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि आरोपी आम नागरिक होते, तो अब तक गिरफ्तारी और कार्रवाई हो चुकी होती। वर्दीधारी आरोपियों के मामले में यही सुस्ती संदेह को जन्म देती है।
वीडियो वायरल, न्याय की सार्वजनिक गुहार
न्याय न मिलता देख पीड़ित ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक अपील की है। वीडियो में साफ शब्दों में कहा गया है कि यदि पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे शिकायत की जाएगी। यह चेतावनी सिर्फ प्रशासन को नहीं, बल्कि व्यवस्था को आईना दिखाने जैसी है—जहां पीड़ित को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।
पुलिस का पक्ष जांच जारी
मामले के विवेचक और महाराजपुर थाना प्रभारी का कहना है कि जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई होगी। पीड़ित को साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। लेकिन सवाल यह है कि जब एफआईआर दर्ज है और आरोप गंभीर हैं, तो विवेचना की समय-सीमा और प्रगति सार्वजनिक क्यों नहीं?






