कन्नौज में स्वच्छता मिशन पर सवाल: अपशिष्ट केंद्र बना बदहाली का प्रतीक

कन्नौज के उमर्दा ब्लॉक में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थापित रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) अब खुद अव्यवस्था और गंदगी का केंद्र बनता नजर आ रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए इस केंद्र का उद्देश्य गांवों को कचरा मुक्त करना था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।

सड़क किनारे दुर्गंध और अव्यवस्था से राहगीर परेशान

कुढ़िना और सरौली ग्राम के बीच मुख्य मार्ग पर स्थित यह अपशिष्ट केंद्र सड़क के बिल्कुल किनारे बना है, जहां से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं। वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निस्तारण न होने के कारण पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैली रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केंद्र अब स्वच्छता का नहीं, बल्कि गंदगी का प्रतीक बन चुका है।

कचरे का अंबार, ट्रीटमेंट पूरी तरह ठप

ग्रामीणों के अनुसार, केंद्र पर केवल कचरा इकट्ठा किया जा रहा है, लेकिन उसका कोई उचित ट्रीटमेंट नहीं हो रहा। वर्मीकम्पोस्टिंग (खाद निर्माण) की प्रक्रिया महीनों से बंद पड़ी है और मशीनें शोपीस बनकर रह गई हैं। इससे कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।

नियमों की अनदेखी: सूखा-गीला कचरा अलग नहीं

ग्राउंड रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कचरे के पृथक्करण (सूखा और गीला) की प्रक्रिया पूरी तरह ठप है। कचरे की प्रोसेसिंग नहीं होने से पूरा सिस्टम निष्क्रिय हो चुका है। परिसर में बने शौचालयों की हालत भी बेहद खराब है, जहां लंबे समय से सफाई नहीं हुई और मिट्टी की मोटी परत जमी हुई है।

ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

स्थानीय ग्रामीणों—शरद सिंह यादव, सनी सिंह यादव, प्रांशु यादव और सजल यादव—ने इस स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं और जमीनी स्तर पर कोई निगरानी नहीं हो रही।

कार्रवाई का आश्वासन, सुधार की उम्मीद

मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्राम प्रधान प्रतिनिधि लाल सिंह यादव ने स्वीकार किया कि केंद्र की अव्यवस्था उनके संज्ञान में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही जांच कराकर दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी और कचरा प्रबंधन को पुनः सुचारू किया जाएगा।

सवाल उठाता मामला: क्या योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित।

यह पूरा प्रकरण एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या स्वच्छता से जुड़ी सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं? यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह केंद्र न केवल पर्यावरण बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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