महर्षि कश्यप जयंती पर तिर्वानगर में निकली भव्य शोभायात्रा, जनसैलाब उमड़ा
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तिर्वा (कन्नौज)। सृष्टि के सृजक और सप्तऋषियों में प्रमुख माने जाने वाले महर्षि कश्यप जी की जयंती के अवसर पर तिर्वानगर में भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। शोभायात्रा का शुभारंभ विधिवत आरती के साथ किया गया, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में कश्यप, बाथम एवं सर्वसमाज के लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का दिखा संगम
शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। विभिन्न स्थानों से आए समाज के लोगों ने महर्षि कश्यप जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए यात्रा में सहभागिता निभाई। आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और धार्मिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं।उल्लेखनीय है कि महर्षि कश्यप को हिंदू परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है और उन्हें सप्तऋषियों में से एक माना जाता है, जिन्होंने सृष्टि के विस्तार और ज्ञान परंपरा के संवर्धन में अहम भूमिका निभाई ।
महर्षि कश्यप के आदर्श आज भी प्रासंगिक
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि महर्षि कश्यप जी के आदर्श, नैतिक मूल्य और लोक-कल्याणकारी विचार आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में सद्भाव, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।भारत के विभिन्न राज्यों में भी महर्षि कश्यप जयंती को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है तथा कई स्थानों पर इस अवसर पर शोभायात्रा, पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ।
जनप्रतिनिधियों की रही सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर तिर्वा विधायक कैलाश राजपूत, मिथिलेश बाथम, श्यामू राजपूत, सौरभ गुप्ता सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने समाज के साथ मिलकर शोभायात्रा में भाग लिया और महर्षि कश्यप जी को नमन किया।कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इसे सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक बताया।
हर वर्ष बढ़ रहा आयोजन का स्वरूप
स्थानीय लोगों के अनुसार, महर्षि कश्यप जयंती पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है और इसे क्षेत्रीय अवकाश के रूप में भी मान्यता प्राप्त है ।तिर्वानगर में आयोजित यह शोभायात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और महर्षि कश्यप जी के आदर्शों के प्रसार का भी प्रभावी माध्यम साबित हुई।






