कन्नौज जिला जेल में बंदियों ने दी साक्षरता परीक्षा, शिक्षा से सुधार की नई उम्मीद
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उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के अनौगी स्थित जिला कारागार में रविवार को एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। भारत सरकार के नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जेल में निरक्षर या कम शिक्षित बंदियों के लिए साक्षरता परीक्षा का आयोजन किया गया। इस परीक्षा में कुल 32 बंदियों ने भाग लिया, जिनमें 28 पुरुष और 4 महिला बंदी शामिल रहीं। यह पहल उन बंदियों के लिए विशेष रूप से आयोजित की गई थी जो जेल में आने से पहले पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे या बहुत कम शिक्षित थे। जेल प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे साक्षरता कक्षाओं में भाग लेकर उन्होंने बुनियादी शिक्षा हासिल की और अब उसी का आकलन करने के लिए परीक्षा दी।
नव भारत साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य
भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (New India Literacy Programme – NILP) वर्ष 2022 से लागू एक केंद्रीय योजना है, जिसका उद्देश्य 15 वर्ष से अधिक आयु के निरक्षर नागरिकों को पढ़ना-लिखना और गणना जैसे बुनियादी कौशल सिखाना है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप देश में वयस्क साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए चलाया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से न केवल पढ़ना-लिखना सिखाया जाता है, बल्कि दैनिक जीवन से जुड़ी आवश्यक क्षमताओं जैसे संख्यात्मक ज्ञान और जागरूकता को भी विकसित किया जाता है, ताकि शिक्षार्थी समाज में बेहतर ढंग से आगे बढ़ सकें।
जेल में पढ़ाई के प्रति दिखा उत्साह
जिला जेल में आयोजित इस परीक्षा के दौरान बंदियों में काफी उत्साह देखने को मिला। कई बंदियों ने बताया कि जेल में चल रही साक्षरता कक्षाओं के माध्यम से उन्होंने पहली बार अपना नाम लिखना और साधारण वाक्य पढ़ना सीखा। जेल प्रशासन के अनुसार, यह पहल बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पढ़ाई के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे भविष्य में बेहतर जीवन की उम्मीद कर पा रहे हैं।
जेल अधीक्षक ने बताया—शिक्षा से बदलेगा जीवन
इस अवसर पर प्रभारी जेल अधीक्षक सूबेदार यादव ने कहा कि कारागार में बंदी पूरे उत्साह के साथ पढ़ाई कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब ये बंदी जेल से बाहर निकलेंगे तो अनपढ़ होने का कलंक खत्म होगा और वे समाज में अधिक जागरूक नागरिक के रूप में जीवन जी सकेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा से न केवल व्यक्तिगत जीवन में बदलाव आता है बल्कि इससे अपराध की प्रवृत्ति में भी कमी आने की संभावना रहती है। कार्यक्रम के दौरान उप कारापाल रामबहाल दूबे, उर्मिला सिंह, अध्यापक मनोज कटियार और सुनील कुमार सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे।
सुधारात्मक व्यवस्था की ओर एक महत्वपूर्ण कदम
देश की कई जेलों में अब शिक्षा और कौशल विकास को सुधारात्मक नीति का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा बंदियों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करती है। कन्नौज जिला जेल में आयोजित यह साक्षरता परीक्षा इसी दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है, जो यह संदेश देती है कि जेल केवल सजा का स्थान नहीं, बल्कि जीवन सुधारने का अवसर भी बन सकता है।






