14 मार्च को होगा कन्नौज इत्रोत्सव: खुशबू की नगरी की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया मंच

भारत की प्रसिद्ध इत्र नगरी कन्नौज में आगामी 14 मार्च को आयोजित होने वाले “इत्रोत्सव” को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन इस आयोजन को भव्य बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कन्नौज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना तथा यहां के विश्व प्रसिद्ध इत्र उद्योग को एक बड़ा मंच प्रदान करना है।

पारंपरिक इत्र उद्योग को मिलेगा प्रोत्साहन

इत्रोत्सव के माध्यम से कन्नौज के पारंपरिक इत्र निर्माताओं और कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। सदियों पुरानी देग-भपका पद्धति से बनने वाले कन्नौज के इत्र की खुशबू देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इस आयोजन के जरिए स्थानीय उद्योग को नई पहचान देने और व्यापारिक संभावनाओं को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगा इत्रोत्सव

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोक कला प्रदर्शन, प्रदर्शनी और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके माध्यम से कन्नौज की ऐतिहासिक धरोहर, परंपरागत कला और स्थानीय संस्कृति को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी

इत्रोत्सव की तैयारियों और आयोजन के दौरान जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय उपस्थिति देखने को मिली। इस अवसर पर जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और कहा कि इत्रोत्सव कन्नौज की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जनप्रतिनिधियों ने बताया कन्नौज की पहचान का उत्सव

इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया, तिर्वा विधायक कैलाश राजपूत और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रिय शाक्य भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि इत्रोत्सव कन्नौज की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक इत्र उद्योग को नई दिशा देगा तथा इससे जिले के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

कन्नौज की खुशबू पहुंचेगी देश-विदेश तक

आयोजकों का मानना है कि इत्रोत्सव के माध्यम से कन्नौज की खुशबू और यहां की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। यह आयोजन न केवल कन्नौज की ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित करेगा बल्कि स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों के लिए नए अवसर भी पैदा करेगा।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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