समधन में गूंजा एकता का स्वर: हिन्दू सम्मेलन में सामाजिक समरसता का लिया गया संकल्प

संवाद 24 संवाददाता। समधन क्षेत्र के सेठानी मंदिर परिसर में शनिवार को आयोजित हिन्दू सम्मेलन ने क्षेत्रीय स्तर पर सामाजिक एकता और समरसता को लेकर एक संगठित विमर्श को जन्म दिया। विभिन्न गांवों से आए लोगों की भागीदारी के साथ संपन्न हुए इस सम्मेलन में समाज के भीतर सहयोग, संगठन और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में बढ़ती सामाजिक दूरी, जातिगत विभाजन और वैचारिक असंगठन की चुनौतियों पर विचार करते हुए समरस समाज की दिशा में ठोस प्रयासों का संकल्प लेना बताया गया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए विभाग प्रचारक राहुल कुमार ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि समय की मांग है कि समाज आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुटता की भावना को मजबूत करे। उन्होंने कहा कि संगठन ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है और संगठित समाज ही राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे व्यक्तिगत हितों से आगे बढ़कर सामूहिक हित को प्राथमिकता दें।

अपने वक्तव्य में उन्होंने विशेष रूप से जातिगत भेदभाव को सामाजिक कमजोरी बताते हुए इसे समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज तब तक पूर्ण रूप से सशक्त नहीं हो सकता, जब तक सभी वर्ग समान सम्मान और अवसर के साथ आगे नहीं बढ़ते। सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए परस्पर संवाद, सहयोग और सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने संस्कारों और परंपराओं की रक्षा की है, और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत रही है।

सम्मेलन के दौरान विभाग प्रचारक ने अपने संबोधन के बीच एक प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत कर वीर सावरकर सहित अनेक क्रांतिकारियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। गीत के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को याद करते हुए उपस्थित जनसमूह में राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यबोध की भावना जगाई। इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम में भावनात्मक ऊर्जा का संचार किया और श्रोताओं ने तालियों से उनका स्वागत किया।

सम्मेलन में अन्य वक्ताओं ने भी भारतीय संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से ही समाज को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक समरसता केवल भाषणों से नहीं, बल्कि व्यवहारिक स्तर पर अपनाई गई समानता और सम्मान की भावना से स्थापित होती है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह ने सामाजिक एकता और राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प दोहराया। सम्मेलन में उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद का अवसर मिलता है और आपसी समझ बढ़ती है। ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित इस सम्मेलन ने स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक सक्रियता को भी बल दिया।

इस अवसर पर राधेश्याम पाल, पंकज शर्मा, अतुल कुमार, बृजेश कुमार, धनंजय, शशिकांत, आलोक, अवधेश कुमार शर्मा, राम अवतार, भजनलाल, विपिन कुमार, जय गोपाल, राजेश शर्मा, आनंद, विपिन सक्सेना, शिवहरी सक्सेना, अनिल कुमार एवं अर्जुन शाक्य सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन समिति के सदस्यों ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया और कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया।

सम्मेलन में युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। वक्ताओं ने युवाओं से आग्रह किया कि वे सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाएं और सकारात्मक बदलाव के वाहक बनें। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाती है, तो भविष्य में समाज अधिक संगठित और सशक्त स्वरूप में उभरेगा।

समधन क्षेत्र में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक विमर्श का मंच भी बना। कार्यक्रम में सामाजिक कुरीतियों, आपसी मतभेदों और संगठनात्मक चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की गई। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि समाज की मजबूती का आधार पारस्परिक विश्वास और सहयोग है। ग्रामीण क्षेत्र में इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल सामाजिक एकता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर सकारात्मक संवाद की परंपरा को भी मजबूत करते हैं।

Shivpratap Singh
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