कन्नौज में सड़े आलू के ढेर बने परेशानी का कारण, डीएम के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां
Share your love

संवाद 24 संवाददाता। सड़कों और संपर्क मार्गों के किनारे सड़े आलू और कूड़े के ढेर लगे होने से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोल्ड स्टोरेज से बड़ी मात्रा में बाहर निकाले जा रहे खराब आलुओं को खुले में फेंके जाने से जहां गंदगी और दुर्गंध फैल रही है, वहीं राहगीरों का निकलना भी दुश्वार हो गया है। यह स्थिति तब बनी हुई है, जब जिलाधिकारी द्वारा खुले में आलू फेंकने पर सख्त रोक के निर्देश दिए जा चुके हैं।
शहर और ग्रामीण इलाकों में हालात चिंताजनक
इन दिनों कन्नौज शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क किनारे सड़े आलू के ढेर आम नजर आ रहे हैं। कोल्ड स्टोरेज में नए आलू के भंडारण की तैयारियों के चलते पुराने आलू बाहर निकलवाकर संपर्क मार्गों, बागों और खाली जमीनों पर डाले जा रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।
एक महीने पहले दिए गए थे सख्त निर्देश
करीब एक माह पूर्व कलक्ट्रेट में हुई बैठक में जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने कोल्ड स्टोरेज संचालकों को खुले में आलू फेंकने से सख्ती से मना किया था। साथ ही नगर पालिकाओं को भी निर्देश दिए गए थे कि सड़क किनारे कूड़ा फेंकने वालों को नोटिस जारी किया जाए। निगरानी के लिए एक संयुक्त टीम का गठन भी किया गया था।
निगरानी ढीली पड़ते ही फिर शुरू हुआ खुले में निस्तारण
शुरुआती दिनों में कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने आलू को भीतर ही रखा, लेकिन समय बीतने के साथ निगरानी कमजोर पड़ गई। इसका परिणाम यह हुआ कि एक बार फिर खुले में सड़े आलू फेंके जाने लगे। इससे डीएम के आदेशों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कई इलाकों में आवागमन प्रभावित
जसौली से उदैतापुर जाने वाली सड़क के किनारे, जसौली गांव के बाहर स्थित एक बाग और इमलियापुरवा गांव से पहले सड़क के दोनों ओर सड़े आलू के ढेर देखे जा रहे हैं। इन स्थानों पर दुर्गंध के कारण ग्रामीणों, राहगीरों और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बागों में पड़े आलुओं के आसपास बच्चे खेलते हैं, जिससे स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ गया है।
जिम्मेदार अधिकारी तय, लेकिन कार्रवाई शून्य
सड़े आलू खुले में फेंके जाने पर रोक लगाने की जिम्मेदारी जिला उद्यान अधिकारी सीपी अवस्थी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनमोल राठौर और वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी को सौंपी गई थी। इन अधिकारियों द्वारा कोल्ड स्टोरेज संचालकों को नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका कोई ठोस असर नजर नहीं आ रहा है। अब तक किसी भी कोल्ड स्टोरेज के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
जनस्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। सड़े आलू से उठने वाली दुर्गंध और कीटाणुओं से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। लोग प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई और नियमित निगरानी की मांग कर रहे हैं।






